जेएनयू की घटना पर क्या कहते हैं दुनियाभर के अखबार
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दिल्ली के जेएनयू में हुई घटना और छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी को विदेशी मीडिया में भी खासी कवरेज मिल रही है।
'द वॉशिंगटन पोस्ट' में इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि जेएनयू में हुए इस वाकये के बाद से भारत में लोकतंत्र, देशद्रोह और कैंपस राजनीति पर एक गरमागरम बहस छिड़ गई है।
अखबार लिखता है कि कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद मोदी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वो कॉलेज की राजनीति को भी अपने मुताबिक नियंत्रण में लेना चाहती है।
साथ ही अखबार ने भारत के कई नामचीन पत्रकारों की इस मसले पर प्रतिक्रिया को भी जगह दी है जिसमें उन्होंने इस घटना को बेवजह तूल दिए जाने की बात कही है।
'असहिष्णुता के बढ़ने का पैदा हुआ डर'
'द टेलीग्राफ' ने छापा है कि छात्रनेता कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी का विरोध जेएनयू छात्र संघ और शिक्षक कर रहे हैं और उनके इस विरोध प्रदर्शन का ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसी यूनिवर्सिटीज ने साथ देने का फैसला किया है।
अखबार के मुताबिक इन दोनों समेत ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालयों ने एक साझा बयान जारी कर कहा कि कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी से भारत में एक बार फिर असहिष्णुता के बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
'द वॉल स्ट्रीट' जर्नल लिखता है कि जेएनयू छात्र की देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी ने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस एक बार फिर से छेड़ दी है।
'मौलिक अधिकारों को दबाया जा रहा'
अखबार के मुताबिक एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वो लोग आमने-सामने आ खड़े हुए हैं जो कह रहे हैं कि मोदी राज में लोगों के मौलिक अधिकारों को लगातार दबाया जा रहा है।
'द गार्डियन' ने कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी पर जेएनयू और भारत की बाकी यूनिवर्सिटीज में विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से छापा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कन्हैयाकुमार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए लिखा है कि हाल फिलहाल के सालों में राजनैतिक वजहों से लोगों पर राष्ट्रद्रोह के मामले लगाए जा रहे हैं।
जिसमें मुंबई में एक कार्टूनिस्ट पर राष्ट्रद्रोह का मामला हो या कुछ कश्मीरी छात्रों को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का समर्थन करने पर उन पर देशद्रोह का मामला।