नई सरकार में बीफ कारोबार का क्या होगा?
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सुबह का वक़्त है, एक के बाद एक आते जा रहे लोगों के हाथ में खाने का सामान है। कुछ के हाथ में गुड़ की भेलियां हैं, कुछ के हाथ में घास है लेकिन ज़्यादातर के हाथ में कुछ रोटियां हैं।
ये सारे लोग दक्षिण दिल्ली के एक मंदिर के एक खुले अहाते में मौजूद तक़रीबन 700 गायों को खाना खिलाने के लिए इकट्ठा हैं। बहुत से शहरों में इस तरह के कई आश्रय हैं जहां बूढ़े और आवारा जानवरों को पनाह दी जाती है ताकि धार्मिक हिंदू उन्हें खाना खिला सकें और उनकी पूजा कर सकें।
शायद यही वजह है कि कई लोगों के लिए भारत का बीफ़ निर्यातक देशों में अग्रणी होना झटका देनी वाली ख़बर है।
बीफ कारोबार पर सवाल
गृहिणी जागृति चड्ढा कई सालों से गाय का आशीर्वाद लेने के लिए आ रही हैं। वह कहती हैं, "मैं हैरान हूं।"
वे कहती हैं, "हमारी मान्यता है कि गाय में हज़ारों देवी देवताओं का निवास है। इसलिए हम उन्हें रोज़ आहार देते हैं। इन गायों के माध्यम से हमारे पुरखों की आत्माएं हमें आशीर्वाद देती हैं। कोई उन्हें मारने और उससे पैसा कमाने के बारे में कैसे सोच सकता है?"
लेकिन जिन कारखानों में निर्यात के लिए मांस को तैयार किया जाता है उनमें गाय की बजाय ज़्यादातर भैंस के मांस का प्रयोग किया जाता है।
दुनिया की कुल भैंसों की आधी संख्या भारत में है। दुनिया भर में भैंस के मांस की बढ़ती मांग से भारत को काफ़ी फ़ायदा हो रहा है।
अरबों का कारोबार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाय और भैंस दोनों के मांस को बीफ़ कहते हैं। दिल्ली से कुछ घंटे की दूरी पर उत्तर प्रदेश में कई बीफ़ प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां हैं। मनचाहे आकारों में कटा बीफ़ यहीं से पूरी दुनिया में खाने की मेजों पर पहुंचता है।
बीफ़ को हलाल मानकों या इस्लामी क़ानूनों के अनुरूप तैयार करके अल साक़िब एक्सपोर्ट्स ने पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के बाज़ारों में निर्यात में करने में सफलता प्राप्त की है।
भारत हर साल 65 से ज्यादा देशों को 3।2 अरब डॉलर (करीब 19,000 करोड़ रुपए) के भैंस के मांस की बिक्री करता है। भैंस के मांस की मांग बढ़ रही है क्योंकि वो गाय के मांस से सस्ता है।
बीफ कारोबार का हाल
अल साक़िब एक्सपोर्ट्स के निदेशक साक़िब अख़लाक़ कहते हैं कि उनके पास पहले से ही पाँच प्रोसेसिंग प्लांट हैं और भारी मांग के कारण वो दो और क़त्लगाह तैयार करा रहे हैं।
वे कहते हैं, "भारतीय बीफ़ की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है। यह क्लिक करें ब्राज़ील के बीफ़ जितना ही अच्छा होता है। हमें उम्मीद है कि ज़ल्द ही हम और देशों को निर्यात शुरू कर सकेंगे। हमें बहुत अच्छे दाम मिल रहे हैं।"
लेकिन भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के नेता अपने भाषणों में इस कारोबार की भी आलोचना कर रहे हैं। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि बीफ़ का कारोबार रुक जाए। अपने भाषणों में उन्होंने इसे भारत की 'गुलाबी क्रांति' कहा था।
बीफ़ निर्यात की आलोचना
नरेंद्र मोदी के इस बयान से बीफ़ के कारोबारी परेशान है हालांकि वो सार्वजनिक रूप से इसके बारे में बात नहीं करना चाहते। निर्यात कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन भारत में भी भैंस के मांस की मांग बढ़ रही है, ख़ासकर शहरी इलाक़ों में इसकी खपत बढ़ी है।
दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े में क़बाब की गली में भैंस के मांस से बना सीक कबाब खाने के लिए नौजवान और बुज़ुर्गों की भीड़ लगी हुई है। ग़ालिब कबाब शॉप के खानसामे मोहम्मद शहाब ख़ान को अपने गोपनीय पाकविधि पर गर्व है।
वे कहते हैं, "मैं यहां दशकों से कबाब बना रहा हूं।" वे कहते हैं, "पर्यटक और स्थानीय लोग यहां इसलिए आते हैं क्योंकि हम सबसे अच्छे मांस का प्रयोग करते हैं। लेकिन अब नौजवान आते हैं और बड़े (भैंस) के रोल और कबाब के बारे में पूछते हैं।"
चिकन और फिश ज़्यादा लोकप्रिय
हालांकि मांसाहारियों के बीच अब भी चिकन और फिश की खपत ज़्यादा होती है लेकिन इस बात में शायद ही कोई शक़ है कि बीफ़ की लोकप्रियता भी काफ़ी बढ़ रही है।
शहाब ख़ान की दुकान पर पहली बार खा रहे अभिजीत जुंगाड़े कहते हैं कि वो पूरी दुनिया में घूमते रहते हैं और उन्होंने अलग-अलग देशों में बीफ़ के बने कई प्रकार के व्यंजन खाए हैं।
वे कहते हैं, "मुझे भारत में बीफ़ खाना ज़्यादा पसंद है, बस यह थोड़ा और साफ़-सफ़ाई से बनाया जाए और बेहतर तरीक़े से पेश किया जाए।"
उनकी सहयोगी ऐश्वर्या बोडके कहती हैं, "मुझे बीफ़ बहुत पसंद है, यह बहुत स्वादिष्ट होता है। मुझे चिकन से ज़्यादा रेड मीट पसंद है। लेकिन मुझे हमेशा ऐसी जगह खोजनी पड़ती है जहां यह मिलता हो, क्योंकि भारत में यह आसानी से नहीं मिलता।"
गोवध के संबंध में भारत के कड़े क़ानून और रेस्तरां में बीफ़ परोसने पर सख्ती के बावजूद ऐसा महसूस नहीं होता कि इसका बाज़ार पर कोई असर पड़ रहा है। लेकिन इस बात को लेकर थोड़ी चिंता ज़रूर दिख रही है कि अगर भाजपा सत्ता में आ गई तो क्या होगा? अगर भाजपा अपनी बीफ़ विरोध नीति पर टिकी रही हो तो भारत का बीफ़ उद्योग अपनी चमक खो सकता है।