सदन में एफडीआई पर किस नेता ने क्या कहा?

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 05 Dec 2012 07:39 AM IST
what leaders said in parliament in fdi
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधे वार करते हुए कहा कि सोनिया गांधी यह कहकर किसको चुनौती दे रही हैं कि मनमोहन सिंह सरकार ने बहुत कम समय में विकास के अनेक काम किए हैं।

आजादी के साठ साल में पचास साल तो देश में कांग्रेस का राज रहा। इसमें चालीस साल नेहरू-गांधी परिवार का। क्या सोनियाजी अपने ननिया सुसर जवाहरलाल नेहरू, सासू मां (इंदिरा गांधी) या अपने पति (राजीव गांधी) की सरकार को चुनौती दे रही हैं?

दाल-चावल बेचना न सिखाएं
सुषमा स्वराज ने कहा कि हम हर चीज में एफडीआई का विरोध नहीं करते। प्रधानमंत्रीजी मुझे वर्ल्ड इनवेस्टर्स फोरम में साथ ले चलें तो मैं जी भर कर कहूंगी कि एफडीआई आए। ऊर्जा में, इन्फ्रस्ट्राक्चर में, एयरलाइंस में... लेकिन हमें दाल-चावल बेचना न सिखाएं। यह काम हम बरसों से करते आ रहे हैं। हमारे पश्चिम के किसान अरुणाचल तक जाकर चावल बेचते हैं।

चीन को होगा असली फायदा
भारत में एफडीआई आने का सबसे ज्यादा फायदा चीन को होगा। विदेशी किराना स्टोर यदि तीस फीसदी चीजें भारत की लेगें तो 70 फीसदी विदेश से। ये विदेशी माल कहां बनेगा? चीन में। वहां फैक्ट्रियां खुलेंगी और व्यापारी समृद्ध होंगे। लेकिन भारत के 12 करोड़ परिवारों के घरों में अंधेरा छा जाएगा।

मुलायम विरोध में पर सवाल वोट का
मुलायम सिंह ने कहा कि हम एफडीआई का विरोध करते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि विपक्ष के सारे तर्कों को स्वीकार लें। एफडीआई से छोटे उद्योगों को नुकसान होगा। कोका कोला आया था तब भी किसानों के विकास की बात कही गई थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सोनिया जी आप स्वदेशी सिद्धांतों को भूल रही हैं और विदेशी फार्मूलों की तरफ देख रही हैं। मुलायम ने अपने बयान में वोटिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की।

...लेकिन डीएमके देगी वोट
डीएमके के टीकेएस इलेंगोनवन ने कहा कि हम एफडीआई का कड़ा विरोध करते हैं, लेकिन हम सरकार के खिलाफ वोट नहीं देंगे। हम भाई हैं और मिल कर हमने अच्छा काम किया है। हमें समस्या सिर्फ सरकार के एक फैसले से है, इसके लिए रिश्ते नहीं बिगाड़े जा सकते।

क्या होगी माया की चाल
बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को संसद में हुई बहस के बावजूद अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने कहा था कि संसद में बहस के बाद ही वह वोटिंग को लेकर फैसला लेंगी। ऐसे में कयासों का बाजार गर्म है।

सिब्बल ने किया बचाव
हम एफडीआई थोप नहीं रहे। अगर कोई मुख्यमंत्री अपने राज्य में एफडीआई लाना चाहे तो आप उसे कैसे रोक सकते हैं। देश के केवल चुनिंदा शहरों में विदेशी किराना खुलेंगे तो यह कहना कि हिंदुस्तान बिक जाएगा वॉलमार्ट कब्जा कर लेगा, बेकार की बातें हैं।

विपक्ष को तय करना है कि वह किसानों के साथ है या बिचौलियों के। जिन चीजों के दाम पेप्सीको छह रुपये देती है, किसान को बाजार में उनका तीन रुपये मिलता है। एफडीआई से किसान को ज्यादा पैसा मिलेगा और समय पर मिलेगा।

एफडीआई से देश में विदेशी पैसा आएगा। जो भी एफडीआई लाना चाहता है उसे देश में सौ मिलियन डॉलर निवेश करना पड़ेगा, इसमें से पचास मिलियन डॉलर उसे बैकहैंड इनफ्रस्टाक्चर में निवेश करने पड़ेंगे। इससे स्थानीय बाजार को कई सुविधाएं मिलेंगी। वह मजबूत होगा।

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