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'यौन उत्पीड़न के आरोपों से सदमा लगा'

Sat, 30 Nov 2013 12:05 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 30 Nov 2013 12:05 PM IST
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what kind of question is this says justice ganguly

महिला प्रशिक्षु के यौन उत्पीड़न के आरोपों को नकारते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके गांगुली ने शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से उन्हें सदमा लगा है।

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जस्टिस गांगुली ने कहा, ‘मैं इन सबसे इनकार करता हूं। मैंने समिति से भी कहा है कि प्रशिक्षु की ओर से लगाये गये सभी आरोप गलत हैं। मैं नहीं जानता कि कैसे ऐसे आरोप मेरे खिलाफ लगाये गये हैं।’
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जस्टिस गांगुली शीर्षस्थ अदालत की ओर से मीडिया को जारी किए गए एक अधिकृत बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

जस्टिस गांगुली ने टेलीविजन चैनलों से कहा कि वह पूरी तरह इन आरोपों से इनकार करते हैं। वह परिस्थितियों का शिकार हुए हैं। वह किसी भी बात के लिये शर्मिंदा नहीं हैं।
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हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस मामले की तुलना तरुण तेजपाल प्रकरण से नहीं की जा सकती है।

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जस्टिस गांगुली ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप पूरी तरह गलत हैं। इस लड़की ने यौन शोषण का कोई मसला उनके समक्ष नहीं उठाया था।

उन्होंने कहा, ‘मैंने इस लड़की को कोई शारीरिक क्षति नहीं पहुंचायी। प्रशिक्षु ने मेरे साथ काम किया। हालांकि आधिकारिक रूप से वह उन्हें आवंटित नहीं की गई थी। यह प्रशिक्षु एक अन्य प्रशिक्षु के स्थान पर आई थी, जो विवाह के बाद विदेश चली गई थी। मैंने कोई पोस्टर नहीं लगाया था। वह अपने आप ही आई थी। यह लड़की काम के सिलसिले में कई बार उनके घर आई थी।’


होटल के कमरे में इस लड़की को बुलाने संबंधी आरोप के बारे में उन्होंने कहा कि उस समय काम के सिलसिले में वह दिल्ली में थे और वह भी दिल्ली में थी।

जस्टिस गांगुली के मुताबिक, ‘मुझे पता है कि उसने क्या कहा था। सवाल यह है कि जब मैं दिल्ली में था तो वह भी दिल्ली में थी। वह अपने आप मेरे पास आई थी। यदि कोई मेरे साथ काम करने में असहज महसूस करता है तो वह जाने के लिये स्वतंत्र थी।’

जस्टिस गांगुली ने कहा कि एक तरफ उसका कहना है कि वह उनका सम्मान करती है और किसी प्रकार का विद्वेष नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु उनके बच्चे की तरह थी और उन्होंने उसके प्रति वैसा ही व्यवहार किया। जांच समिति की रिपोर्ट के संबंध में जस्टिस गांगुली ने कहा, ‘मैं नहीं जानता किस प्रकार की कटु टिप्पणी होगी।’
उन्होंने कहा कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो न्यायाधीशों के लिये काम करना दुश्वार हो जायेगा।

क्या हैं आरोप
6 नवंबर को लिखे गए ब्लॉग में प्रशिक्षु ने आरोप लगाया कि इंटर्नशिप के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया।

प्रशिक्षु ने लिखा था, ‘दिल्ली में उस समय यूनिवर्सिटी में मेरे अंतिम वर्ष के शीतकालीन अवकाश के दौरान मैं प्रशिक्षु थी।

मैं अपने अंतिम सेमेस्टर के दौरान अत्यधिक प्रतिष्ठित, हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के अधीन काम कर रही थी।

मेरी कथित कर्मठता के पुरस्कार के रूप में मुझे यौन उत्पीड़न से एक वृद्ध व्यक्ति ने पुरस्कृत किया जो मेरे दादा की उम्र का था।’

आरोप मीडिया में आने के बाद चीफ जस्टिस ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर न्यायाधीशों की समिति का गठन किया।

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