आखिर क्यों गई देश के 2,900 जांबाज जवानों की जान?
क्या आपको लगता है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ) के जवानों की सबसे ज्यादा जान नक्सली ले रहे हैं? अगर हां, तो आप गलत हैं। भारत की सुरक्षा के लिए नक्सलियों, आतंकियों से लोहा लेने वाले देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के सामने एक नया ‘दुश्मन’खड़ा हो गया है।
हार्ट अटैक (दिल का दौरा पड़ना), कैंसर, एड्स, टीबी, मलेरिया जैसी बीमारियां तो जवानों की जान की दुश्मन बनी ही हैं, साथ ही खुदकुशी की वजह से भी जवानों की जान जा रही है। जितने जवान देश के दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद नहीं हो रहे हैं, उससे ज्यादा इन वजहों से अपनी जान गंवा रहे हैं। इस संबंध में तैयार एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
614 को पड़ा दिल का दौरा
इस रिपोर्ट के अनुसार 2009 से 2014 के बीच 2900 से ज्यादा जवानों कई तरह की बीमारियों व ड्यूटी से अलग काम करते वक्त जान गंवाई। जबकि इसी दौरान कई ऑपरेशनों में अपनी ड्यूटी निभाते हुए 252 जवान मारे गए।
ड्यूटी पर रहते हुए महिला व पुरुष कर्मियों को शारीरिक और मानसिक स्तर कितना कुछ झेलना पड़ता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 614 मौत दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई जबकि 207 ने आत्महत्या कर ली।
इसके अलावा कैंसर (231), मलेरिया (102), एड्स (153), टीबी (33) भी बड़े कारण रहे। 36 मामले ऐसे रहे, जब एक जवान ने साथी जवान को ही गोली मार दी। 1544 जवानों की अन्य बीमारियों के चलते जान चली गई।