मोदी सरकार का 1 साल, कागजों में रही स्मार्ट सिटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप स्मार्ट सिटी योजना पिछले एक साल में कागजों पर ही बनती-बिगड़ती रह गई है। नई सरकार बनने के बाद इस योजना का प्रचार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया था, लेकिन अब आलम यह है कि इस योजना से जुड़ी पिछले एक साल की उपलब्धि के बारे में गिनाना तक मुश्किल होगा। योजना को अमलीजामा पहनाना तो दूर इस संदर्भ में शहरी विकास मंत्रालय की कागजी कार्यवाही भी अधूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, स्मार्ट सिटी तैयार करने की धीमी गति के चलते प्रधानमंत्री कार्यालय की नाराजगी भी मंत्रालय को झेलनी पड़ी है। इसके बावजूद स्थिति में ज्यादा कुछ सुधार नहीं हुआ है। हाल में ही कैबिनेट से स्मार्ट सिटी तैयार करने की योजना को हरी झंडी दे दी गई है। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने इस वर्ष शहरों के चयन होने का आश्वासन दिया है। यह भी कहा गया है कि पहले 20 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चयनित किया जाएगा, लेकिन अब तक इन शहरों के चयन की गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी है।
कैसी होगी स्मार्ट सिटी?
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार स्मार्ट सिटी चुनाव के मानक तैयार किये जा रहे हैं। इस संदर्भ में जल्द दिशानिर्देश जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की कल्पना में स्मार्ट सिटी ऐसी होगी जहां जनता को सभी सुविधाएं अधिकतम 30 मिनट के अंदर मिल जाए।
जनता की जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का जमकर इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं शहर को रोजगारपरक बनाने की कल्पना भी की गई है। अधिकारी ने कहा कि फिलहाल किसी भी स्मार्ट सिटी का चुनाव केंद्र सरकार नहीं कर सकी है।
वहीं महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश समेत तमाम राज्य सरकारों का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी मानक संबंधी दिशानिर्देश जारी नहीं कर देती, राज्यों के लिए इस दौड़ में शहरों का चयन करना मुश्किल है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष 20 स्मार्ट सिटी, अगले वर्ष 40 स्मार्ट सिटी और 2017 में 40 स्मार्ट शहरों के चयन करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत प्रत्येक राज्यों के 2-3 स्मार्ट शहरों का चयन होना है।
स्मार्ट सिटी तैयार करने की रफ्तार धीमी
गुजरात में स्मार्ट सिटी तैयार करने में संयुक्त प्रयास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुकी चीन की कंपनी जेडटीई सॉफ्ट के प्रबंध निदेशक प्रसून शर्मा का कहना है कि बेशक सरकार स्मार्ट सिटी को तैयार करने को इच्छुक है, लेकिन स्मार्ट सिटी तैयार करने की रफ्तार काफी धीमी है।
अभी तक इस संदर्भ में केंद्र ने कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया है। इससे राज्यों के साथ दूसरे सभी साझेदारों की भूमिका को लेकर स्पष्टता नहीं है। कंपनियों को यह समझ नहीं आ रहा कि स्मार्ट सिटी निर्माण में शामिल होने के लिए केंद्र और राज्य में से किससे बात की जाए। पूरे मामले में फिलहाल भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सरकार नए शहर की जगह मौजूदा सिटी को तकनीकी रुप से अपग्रेड कर स्मार्ट सिटी बनाना चाहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अबतक कुछ नहीं हो सका है। स्मार्ट सिटी तैयार करने में साझेदार भी काफी ज्यादा हैं। इसलिए सरकार को स्मार्ट सिटी संबंधित अड़चनों को दूर करने के लिए नेशनल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम का गठन करना चाहिए।