फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   what is state's special status and its scale

क्या है 'विशेष राज्य' का दर्जा और इसके पैमाने

Mon, 18 Mar 2013 11:12 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 18 Mar 2013 11:12 AM IST
विज्ञापन
what is state's special status and its scale

नीतीश कुमार की बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की पुरानी मांग को लेकर सियासी हलचल शुरू हो गई है। हालिया 'अधिकार रैली' में नीतीश ने बिहार को यह दर्जा देने की मांग की है।

विज्ञापन


वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आर्थिक सर्वेक्षण के बाद अपने बजट भाषण में विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी मापदंड में बदलाव की मंशा जता कर नीतीश को सकारात्मक जवाब दिया था। नीतीश का भी कहना है कि जल्द से जल्द इन मानदंडों को लागू किया जाए जिससे बिहार के अलावा अन्य राज्यों को भी इसका लाभ मिले।
विज्ञापन


तो आइए जानते हैं कि क्या सचमुच बिहार विशेष राज्य की दर्जा की कसौटी पर खड़ा उतरता है?

क्या है विशेष राज्य का दर्जा

देश के आर्थिक रूप से पिछड़े और जनजाति बहुल आबादी वाले पहाड़ी इलाके अथवा पड़ोसी मुल्क की सीमा से लगे हुए राज्य इसके अंतर्गत आते हैं।

ऐसे प्रदेशों को केंद्र सरकार की तरफ से विशेष प्रावधान के जरिए उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में छूट और योजना सहायता में सहूलियतें मिलती हैं। यदि कोई निवेशक इन राज्यों में निवेश करता है तो उसे टैक्स बेनिफिट मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिलहाल 11 राज्यों को यह दर्जा हासिल
फिलहाल देश के 11 राज्यों को यह दर्जा हासिल है। इन राज्यों में उत्तर-पूर्व के सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड व त्रिपुरा शामिल हैं। इन राज्यों की आबादी साढ़े चार करोड़ से अधिक है। ये इलाके भारत के कुल क्षेत्रफल का 7 फीसदी है।

इसके अलावा सिक्किम, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को भी विशेष राज्य का दर्जा हासिल है।

विश्लेषक की राय
योजना आयोग के सलाहकार रह चुके प्रणब सेन का कहना है कि जब झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड को अलग राज्य बनाया गया था तब इनमें से केवल उत्तराखंड को ही विशेष राज्य का दर्जा मिला। उत्तराखंड का भौगोलिक इलाका, विकास और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े इलाके कारण बने।

वैसे भी नीतीश कुमार का 'इकोनॉमिक लॉजिक' तर्कसंगत नहीं है। जब झारखंड को बिहार से अलग किया गया था तो बिहार को विशेष आर्थिक पैकेज मिला था। ऐसे में बिहार को अगर किसी आधार पर इस श्रेणी में रखा जाएगा, तो कई अन्य राज्य भी इसके दावेदार हो जाएंगे।


मोंटेक सिंह ने मांग को नकारा
वहीं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का कहना है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। बिहार इस दर्जे की कसौटी पर नहीं उतरता है। वैसे सरकार बीजीआरएफ (बैकवार्ड रीजन्स ग्रांट फंड) के जरिए बिहार और अन्य राज्यों को विशेष पैकेज दे सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed