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मोदी की आबे से दोस्ती चीन के लिए खतरा!

Sat, 30 Aug 2014 05:01 PM IST
प्रो. विलियम्स /बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
प्रो. विलियम्स /बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Sat, 30 Aug 2014 05:01 PM IST
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what about the china in japan-indo friendship?

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान यात्रा पर रवाना हो गए। इस यात्रा से काफी अपेक्षाएं हैं।

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जापान की सोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मुकेश विलियम्स का कहना है कि इस दौरे में मोदी को सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन उतनी नहीं होगी, जितनी मीडिया सोच रहा है।

मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दोनों ही दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री हैं जिनकी दोस्ती पुरानी है। मगर इससे फायदा जरूर होगा।

लेकिन दोनों देशों में चिंता बनी हुई है कि ये दोनों नेता अपने देश को जंग और संघर्ष के रास्ते पर तो नहीं ले जाएंगे। यह एक समस्या है।

जापान दौरे से पहले नरेंद्र मोदी ने जापानी भाषा में आठ ट्वीट किए थे। इनमें कहा गया है कि मोदी आबे के नेतृत्व से बहुत प्रभावित हैं। वह जापान के मेहमानवाजी से और भी ज्यादा प्रभावित हैं।"
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मोदी दो साल पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के बतौर जापान दौरे पर गए थे।

परमाणु समझौते का मुद्दा

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जहां तक जापान के साथ परमाणु समझौते की बात है, इसे लेकर जापान में काफी नापसंदगी है और जापान के गठबंधन वाली पार्टी कोमितो परमाणु ऊर्जा के खिलाफ है। जापान के आम लोग परमाणु ऊर्जा नहीं चाहते।

जापान में साल 2011 में फुकुशिमा में होने वाली परमाणु दुर्घटना के प्रभाव से चिंता अभी तक बनी हुई है।

भारत शक्ति संतुलन के सिद्धांत में विश्वास रखता है। जापान और भारत के बीच बनी इस खाई को पाटना दोनों देशों के लिए खासा मुश्किल होगा। देखना होगा कि नरेंद्र मोदी इस मसले पर क्या करते हैं।

भारत और जापान के बीच परमाणु समझौता अगले हफ्ते तो नहीं होगा। इसमें वक्त लगेगा।

मोदी-आबे की दोस्ती

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जहां तक क्षेत्र में चीन के दबदबे की बात है, दोनों देशों में यह महसूस हो रहा है। जापान में तो बहुत हो रहा है।

चीन के लिए मोदी-आबे की दोस्ती खतरे से खाली नहीं है। जापान को फायदा जरूर होगा हिंदुस्तान से। ऐसा लगता है कि मोदी इस बात पर ज्यादा जोर देंगे।

जहां तक अर्थव्यवस्था का सवाल है इस समय जापानी अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। भारत की अर्थव्यस्था भी अच्छी नहीं है और जापान उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में वह दस साल पहले हुआ करता था।

मोदी को इस दौरे में सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन उतनी ज्यादा नहीं होगी, जितनी मीडिया सोच रहा है।

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क्या मिलेगा भारत को?

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जापान की कंपनियां बडी तादात में भारत में कारोबार कर रही हैं, लेकिन शायद भारतीय कंपनियां जापान में कारोबार के लाभों को नहीं भुना पा रही हैं।

जापान में कई भारतीय तकनीकी कंपनियां हैं। यहां पर वो व्यवसाय नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि वो हाई एंड कारोबार करना चाहते हैं और लो एंड कारोबार चीन को चला जाता है।

जापान कहता है कि वो भारत के साथ अच्छा कारोबार कर रहा है, लेकिन भारत कहता है कि वो तो कुछ भी नहीं कर रहा है। तो दोनों देशों के बीच अपेक्षाओं का एक असंतुलन है।

नौसेना के आधुनिकीकरण में जापान, भारत की मदद कर सकता है। जापान में इस संबंध में कानून पास हो गया है तो जापान भारत को निर्यात कर सकता है। लेकिन जहां तक परमाणु ऊर्जा और निवेश की बात है तो जैसा चल रहा है वैसे ही चलता रहेगा।

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