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हार्दिक पटेल के पीछे कौन, नीतीश, तोगड़िया या केजरीवाल?

Fri, 28 Aug 2015 12:28 PM IST
Updated Fri, 28 Aug 2015 12:28 PM IST
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Well-funded, organized and massive: Who's behind Hardik's war machine?

अभी हाल ही में गुजरात में पाटिदार समुदाय के लोगों को ओबीसी कोटे में आरक्षण देने की मांग के लिए अहमदाबाद में आयोजित हुए क्रांति रैली और उसकी सफलता ने सबको चौंकने पर मजबूर कर दिया। इस क्रांति के बाद भड़की हिंसा और उसके बाद पाटिदार अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल की गिरफ्तारी ने कई सवाल भी खड़े किए।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक क्रांति रैली की इस सफलता के बाद सबसे पहला सवाल तो ये उठा की आखिर कैसे एक 22 साल के लड़के ने अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में लाखों की भीड़ इकट्ठी कर दी। कैसे उस एक इशारे पर इतने सारे लोग उसके साथ हो लिए। क्रांति रैली के लिए शहर में पहुंचे हजारों गाड़ियों की पार्किंग की इजाजत आखिर कैसे दे दी गई। इसके पीछे जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है वो यह है कि आखिर इस रैली के लिए पैसा कहां से आया।
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आखिर कैसे कुछ ही महीनों में इतने सारे लोग हार्दिक पटेल के पीछे हो लिए। ये सभी सवाल लगभग हर उस शख्स को परेशान कर रहे हैं जिन्होंने पाटिदार समुदाय की मंगलवार को आयोजित हुए रैली को टेलीविजन पर देखा है। हार्दिक पटेल की इस चमक ने सबको हिला कर रख दिया।

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एक महीने पहले बनाई समिति

Well-funded, organized and massive: Who's behind Hardik's war machine?

इससे पहले हार्दिक सरदार पटेल ग्रुप का एक सदस्य था और उसकी युवा इकाई में विरामगाम का अध्यक्ष था। करीब एक महीने पहले जुलाई में जब हार्दिक ने पाटिदार अमानत समिति बनाकर उसके प्रचार में जुट गया जिसका सरदार पटेल ग्रुप के नेता लालजी पटेल ने विरोध किया।

हालांकि, हार्दिक रुका नहीं और उसने लगातार कई रैलियां की। इस नई समिति ने एक ही महीने में पूरे गुजरात को हिला कर रख दिया। कई लोगों का मानना है कि हार्दिक के पीछे कई बड़ी ताकतों का हाथ है। हार्दिक ने अहमदाबाद के सहजानंद कॉलेज से 50 प्रतिशत से भी कम अंकों के साथ स्नातक की परीक्षा पास की।

हार्दिक का संबंध एक मध्यमवर्गीय परिवार से है जो अपना गुजारा करने के लिए व्यवसाय करता है। इस आरक्षण के आंदोलन में जुड़ने से पहले हार्दिक अपने पिता के सबमर्सिबल पम्प के व्यवसाय में मदद भी किया करता था।

सामने आए कई बड़े नाम

Well-funded, organized and massive: Who's behind Hardik's war machine?

यह एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल है जिसका जवाब ढुंढ पाना बड़ा ही मुश्किल काम है। अहमदाबाद रैली से पहले एक ऑडियो क्लिप गुजरात के लोगों के बीच वायरल हुआ जिसमें कहा गया था कि गुजरात सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। इस क्लिप में हार्दिक पटेल को प्रवीण तोगड़िया को एक साथ दिखाया गया था।

गौरतलब है कि तोगड़िया के संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के साथ कुछ ठीक नहीं है। अफवाहें तो यह भी है कि हार्दिक पटेल के पीछे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी हाथ है। इस बात को हार्दिक के उस बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उसने अपने भाषण में नीतीश कुमार का नाम लिया था। उसने कहा था कि 'नीतीश कुमार भी अपने ही हैं।'

इसके अलावा जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से पाटिदार रैलियों का बड़े ही सधे तरीके से आयोजन किया गया उससे यह साफ होता है कि कई बड़े पाटिदार नेताओं या लोगों ने इस रैली का संचालन किया। अहमदाबाद में जिस तरह से लोगों की भीड़ जुड़ी थी उससे तो साफ हो जाता है कि इस रैली की सफलता के लिए करोड़ो रुपये खर्च किए गए।

तो आखिर इतने पैसे एक मध्यमवर्गीय परिवार के लड़के के पास आए कहां से। ये सभी बातें साफतौर इस ओर इशारा कर रही हैं कि हो न हो हार्दिक पटेल के पीछे कई बड़े नेताओं और रसूखदार लोगों का हाथ है।

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