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‘सेक्स एजुकेशन से बच्चों का दिमाग खराब’
एजेंसी/हैदराबाद
Updated Mon, 30 Dec 2013 11:31 AM IST
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज ने हाईस्कूल में सेक्स एजुकेशन को गलत ठहराते हुए कहा है कि इससे बच्चों का दिमाग ‘खराब’ हुआ है।
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रविवार को जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी ने बाल यौन शोषण से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘2005-06 में हाई स्कूलों में लांच हुए सेक्स एजुकेशन प्रोग्राम ने सिर्फ कम उम्र में बच्चों का दिमाग खराब किया है।
बच्चों को सही राह पर लाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है।’ हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के भी अध्यक्ष जस्टिस रेड्डी ने यह भी कहा कि संयुक्त परिवार प्रणाली के ध्वस्त होने से बच्चों में असुरक्षा का भाव पैदा हुआ है।
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इसी कार्यक्रम में मौजूद आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कल्याण ज्योति सेनगुप्ता ने माना कि यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम 2012 भले ही एक साल पहले पास हुआ है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अभी काफी कुछ करना बाकी है।
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मीडिया और पुलिस की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘पिछले 20 साल में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध काफी ज्यादा बढ़ गए हैं।
स्कूलों, ग्रामीण क्षेत्रों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई कर इस तरह की घटना को रोका जा सकता है।’
वहीं राज्य के डीजीपी बी प्रसाद राव ने कहा कि न्यूक्लियर फैमिली कल्चर के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। अभिभावक न तो बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिता पा रहे हैं और न ही उनकी देखभाल कर रहे हैं।
यह जिम्मेदारी नौकरानी या वार्डन को सौंप दी गई है। इसके अलावा टीवी, सिनेमा, इंटरनेट और मोबाइल फोन भी बच्चों पर बुरा असर डाल रहे हैं।