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सरकार घबराई, हेलीकॉप्टर सौदा ठंडे बस्ते में
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
Updated Thu, 14 Feb 2013 12:20 AM IST
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इटली से हुए अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों के सौदे में घूस के विवाद में यूपीए सरकार जहां बैकफुट पर आ गई है, वहीं पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी निशाने पर आ गए हैं।
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इटली की अदालत में पेश दस्तावेजों में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच के मुताबिक रक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी फिनमैकानिका ने वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों का सौदा कराने के लिए उन्हें घूस दी थी। त्यागी तब वायुसेना प्रमुख थे।
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इसके बाद बढ़ी राजनीतिक रार को देखते हुए घबराई सरकार ने सौदे को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब जब तक सीबीआई इस पूरे सौदे जांच नहीं कर लेती, सरकार बाकी नौ अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर नहीं लेगी। न ही बकाया 2400 करोड़ रुपये का भुगतान कंपनी को किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपने वक्तव्य में यह बात कही है।
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उल्लेखनीय है कि 2010 में हुए इस सौदे के बाद तीन हेलीकॉप्टर पिछले महीने भारत को मिल चुके हैं। 12 हेलीकॉप्टरों के लिए फिनमैकानिका के साथ कुल 3600 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था। कहा जा रहा है कि कंपनी ने सौदा हासिल करने के लिए 362 करोड़ रुपये की घूस दी।
भारत को अगले महीने मार्च में तीन हेलीकॉप्टर मिलने थे, जबकि शेष छह अगले साल आने थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 2014 में लोकसभा चुनाव हैं और यूपीए सरकार का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस नहीं चाहेगी कि कोई विवादास्पद सौदा उसके लिए मुश्किल का सबब बने।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा इस सौदे को ‘दूसरा बोफोर्स कांड’ कह कर हवा दे रही है और इसके ‘इटली कनेक्शन’ की भी बात कर रही है। वहीं माकपा ने कहा है कि सीबीआई पर सरकार का प्रभाव देखते हुए पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।
विपक्ष की मांग से पहले ही सरकार द्वारा सौदे की सीबीआई जांच कराने से साफ है कि वह बचाव की मुद्रा में है। हमेशा आक्रामक रहने वाले कांग्रेसी महासचिव दिग्विजय सिंह ने बुधवार को ठंडे लहजे में कहा हमारी जगह भाजपा होती तो क्या करती, अब बिना जांच कराए बिना किसी को फांसी पर तो नहीं चढ़ा सकते। सीबीआई को जांच तो सौंप ही दी गई है।
मामले में सरकार के रवैये को सख्त बताने के लिए बुधवार को रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा, ‘सौदा जिस स्तर पर है वहां से भारत सरकार जरूरत पड़ने पर अपना धन वापस भी ले सकती है। यह बात दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते में साफ लिखी है।’
वह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यदि सीबीआई की जांच में घूस देने-लेने की बात साबित होती तो भारत सौदे को रद्द कर देगा। भारत सौदे की रकम का 30 फीसदी भुगतान कर चुका है। इसके बाद जैसे-जैसे हेलीकॉप्टर आते वैसे-वैसे भुगतान की शर्त थी।
इस बीच इटली में हुई जांच की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिनमैकानिका/अगस्ता वेस्टलैंड और भारत सरकार के बीच हुए समझौते में कार्लो गैरोसा और गुइडो राल्फ हैश मुख्य बिचौलिये थे। इटली की अदालत में कहा गया है कि पूरे सौदे में कुल 362 रुपये की घूस में से 100 करोड़ रुपये से अधिक भारतीयों को दिया गया।