'स्किल इंडिया' में बोले मोदी गरीबी के खिलाफ लड़ाई हम जरूर जीतेंगे
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मिशन स्किल इंडिया को लांच करने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर हमें पता चला कि दुनिया भारत की तरफ आदर और सम्मान के साथ देख रही है।
मिशन स्किल इंडिया पर उन्होंने कहा कि ये हमारा मिशन उन लोगों के लिए है जो रह जाते हैं। रह कौन जाता है? अमीर परिवार का बच्चा नहीं रह जाता है। उसको तो कुछ न कुछ मिल जाता है परपंरा से, जो रह जाता है वो गरीब का बच्चा होता है।
हमनें गरीबी के खिलाफ एक लड़ाई शुरू की है और यह लड़ाई हम जीत कर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं गरीबों की एक फौज बनाऊंगा और हर गरीब इसमें मेरी फौज का जवान होगा।
उन्होंने कहा कि आज का नौजवान हाथ फैलाकर मांगने के लिए तैयार नहीं है। वो दयनीय जिदंगी नहीं जीना चाहता है। देश की पहली प्राथमिकता यही होनी चाहिए जिसमें लोगों के लिए अधिक से अधिक युवाओं के लिए रोजगार तैयार किए जा सकें। मोदी ने कहा कि स्किल का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपकी जेब में पैसा आ गया है। स्किल का मतलब है कि आपके पास आत्मविश्वास हो और जिदंगी जीने का एक नया तरीका मिल सके।
'दुनिया में कही भी जाऊंगा और अपना पेट भर लूंगा'
स्किल एक ऐसी योग्यता है जिसके भरोसा रहता है कि दुनिया में कही भी जाऊंगा और अपना पेट भर लूंगा। भीख नहीं मांगूगा। स्किल इंडिया मिशन सिर्फ स्किल तक सीमित नही रहेगा। इसे उद्यमशीलता से भी जोड़ना होगा।
मोदी ने कहा कि मध्य आय वर्ग, कम आय वर्ग के परिवार के बच्चों को नई स्किल जरूर सींखनी चाहिए। इससे सीखने के साथ ही वो अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे।
मोदी ने एक सवाल करते हुए कहा कि जो बात हमारे घरों में गूंजती है वो सरकार के कानों तक क्यों नहीं पहुंचती है। एक बार संतान अगर अपने पैरों पर खड़ी हो जाए, तो गरीब परिवार के मां-बाप को लगता है कि उनका जीवन धन्य हो गया।
गरीब परिवार के लोग बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी नहीं होते हैं। उनका सपना बस यही होता कि कैसे उनका बच्चा आत्मनिर्भर हो जाए।
उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि स्किल इंडिया मिशन के जरिए उनके सपनों को पूरा किया जा सके। सभी राज्यों का साथ लेकर इस दिशा में एक नया ढांचा तैयार किया जा सकता है। हमारे देश की 65 फीसदी जनसंख्या 35 साल कम आयु वर्ग की है। उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। अगर उन्होंने स्किल पर ध्यान नहीं दिया।
अगर उन्होंने खुद उस चुनौती को स्वीकार नहीं किया तो वो हमारे लिए चुनौती बन जाएंगे। भारत की इस समय पहली प्राथमिकता है कि अधिक से अधिक रोजगार पैदा किए जा सकें। विश्व में सबसे ज्यादा अगर कामगार लोग हैं तो वो भारत में ही हैं।
अगर दुनिया भर में चीन अपनी पहचान विश्व मैन्युफैक्चरिंग फैक्टरी के रूप में कर सकता है तो हम विश्व की सबसे बड़ी मानव संसाधन की राजधानी बन सकते हैं।