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NRHM: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें आरोपियों से हमदर्दी नहीं

Thu, 31 Jul 2014 10:38 PM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 10:38 PM IST
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we have no sympathy to accused of nrhm scam says supreme court

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले के आरोपियों पर सख्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपराध में शामिल सफेदपोश किसी तरह की हमदर्दी की उम्मीद नहीं करें।

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जमानत के लिए पहुंचे एक आरोपी की गुहार को अस्वीकार करते हुए सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को कहा कि यह व्हाइट कालर अपराध है। हमारी नजर में इस घोटाले के आरोपी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।
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अदालत ने यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक रहे देवेंद्र मोहन को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की।

जमानत याचिका पर कड़ा संदेश

we have no sympathy to accused of nrhm scam says supreme court

जस्टिस एचएल दत्तू व जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के कड़े रुख पर अभियुक्त के अधिवक्ता केवी विश्वनाथन ने जमानत याचिका को वापस लिए जाने की गुजारिश की।

पीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 मई के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने की मंजूरी प्रदान कर दी।

शीर्षस्थ अदालत ने आदेश में कहा कि अभियुक्त रेगुलर जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा छह माह बाद खटखटा सकता है। निचली अदालत योग्यता के मुताबिक जमानत की मांग का निपटारा करे, लेकिन इससे पहले अभियुक्त की ओर से दायर जमानत याचिका के हस्ताक्षर की तस्दीक कर ले।

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कुशवाहा की जमानत भी हो चुकी है नामंजूर

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शीर्षस्थ अदालत ने इससे पहले अभियुक्त की ओर से दी गई उन तमाम दलीलों को अस्वीकार कर दिया, जिनमें कहा गया कि घोटाले में शामिल होने के संबंध में अभियुक्त के खिलाफ सीबीआई के पास कोई साक्ष्य नहीं है। आरोप पत्र में जो भी सामग्री पेश की गई है, वह तथ्यों से परे है।

इस पर पीठ ने कहा कि यह सफेदपोश लोगों का अपराध है, जिसमें प्रभावशाली लोग शामिल हैं। अदालत से इस मामले में हमदर्दी की उम्मीद नहीं करें। हमें कोई सहानुभूति नहीं है।

याद रहे कि हाल ही में इस मामले के अभियुक्त व बसपा सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा की जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया था।

सीबीआई घोटाले में पूर्व मंत्री कुशवाहा और यूपी के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला समेत अन्य अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर चुकी है।

गौरतलब है कि यूपीपीसीएल के इस अधिकारी पर आपूर्ति के ठेके देने में अनियमितता बरते जाने और घोटाले में शामिल होने के आरोप हैं।

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