'नाम नहीं, काला धन वापस लाने में दिलचस्पी'
सुप्रीम कोर्ट ने विदेश में काला धन रखने वालों के नाम उजागर करने को लेकर जारी विवाद को शांत करने की कोशिश की है। शीर्ष अदालत ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि काला धन रखने वालों के नाम उजागर करने के बजाय उसकी रुचि काला धन स्वदेश लाने में है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने काला धन रखने वालों के नाम सार्वजनिक करने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की जांच अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। उन नामों का खुलासा करना है या नहीं, यह एसआईटी पर निर्भर है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पीठ के समक्ष कहा कि सरकार को उन नामों को सार्वजनिक करना चाहिए, जिन पर विदेशी बैंक खातों में काला धन रखने पर पेनाल्टी लगाई गई है। उन्होंने कहा कि चूंकि इन लोगों ने खुद स्वीकार किया है कि उन्होंने गैरकानूनी काम किया है, लिहाजा उनके नाम सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत नहीं है।
छह माह में काले धन का एक रुपया भी स्वदेश नहीं आया
अदालत ने याचिकाकर्ता राम जेठमलानी की काला धन स्वदेश लाने के बारे में उनके सुझाव लिए जाने की अपील स्वीकार कर ली। जेठमलानी ओर से पेश वरिष्ठ वकील अनिल बी दीवान ने वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के वर्ष 2011 में लिखे उस लेख का जिक्र किया, जिसमें विदेशों में पड़े काले धन को वापस लाने के तरीकों के बारे चर्चा की गई है।
जेठमलानी की ओर से इस संबंध में एक अर्जी दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया था कि एसआईटी को उनके द्वारा सुझाए गए तरीकों पर काम करना चाहिए।
इस पर अदालत ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर एसआईटी के समक्ष सुझाव देने को कहा। जेठमलानी के वकील दीवान ने कहा कि पिछले छह माह में काले धन का एक रुपया भी स्वदेश नहीं आया है। जांच के नाम पर कुछ छापे और संपत्तियों को जब्त किया गया है।
'प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया'
इस पर पीठ ने कहा कि एसआईटी अपना काम भलीभांति कर रही है। पीठ ने दीवान को इस संबंध में एसआईटी से संपर्क करने के लिए कहा है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने काले धन से जुड़े मामलों से जुड़े अपराधों के लिए नया कानून लाने की गुहार की। पीठ ने इस मसले पर भी याचिकाकर्ता को एसआईटी के पास जाने के लिए कहा है।
इसके अलावा पीठ ने सरकार और आम आदमी पार्टी को भी दो हफ्ते के भीतर एसआईटी को सुझाव देने के लिए कहा है। जहां याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि गत वर्ष मई महीने से एसआईटी ने कुछ भी नहीं किया है, वहीं एसआईटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सोली सोराबजी ने कहा कि एसआईटी बहुत काम कर रही है।
जेठमलानी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले धन से संबंधित विधान का एक मसौदा भेजा था लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
एसआईटी सुनेगी राम जेठमलानी के सुझाव
अदालत ने याचिकाकर्ता राम जेठमलानी और अन्य को काला धन स्वदेश लाने के बारे में सुझाव दो सप्ताह के भीतर एसआईटी को देने को कहा है। एसआईटी उन सुझावों पर विचार कर शीर्ष अदालत को एक रिपोर्ट देगी। जेठमलानी ने एक याचिका में कहा गया था कि एसआईटी को उनके द्वारा सुझाए गए तरीकों पर काम करना चाहिए।
छह माह में एक रुपये का काला धन भी नहीं आया स्वदेश
जेठमलानी के वकील अनिल बी दीवान ने अदालत में कहा कि पिछले छह माह में काले धन का एक रुपया भी स्वदेश नहीं आया है। जांच के नाम पर कुछ छापे और संपत्तियों की जब्ती की गई है। इस पर अदालत ने कहा कि एसआईटी अपना काम भलीभांति कर रही है।