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संसद के कामकाज में दखल लक्ष्मण रेखा को लांघना: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 24 Sep 2015 11:44 PM IST
Updated Thu, 24 Sep 2015 11:44 PM IST
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We are no body to decide what MPs can do

बगैर किसी अवरोध के संसद चले, इसके लिए दिशानिर्देश जारी करने की गुहार संबंधी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायपालिका विधायिका के कामकाज में दखल नहीं दे सकती है। इस तरह का प्रयास करना लक्ष्मण रेखा को लांघना है।

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चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि संसद को ऐसे चलना चाहिए और सांसद को ऐसा करना चाहिए। इसे देखने के लिए स्पीकर हैं।
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पीठ ने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में सभी का कामकाज स्पष्ट है। सांसदों को क्या करना चाहिए, यह सांसदों को भलीभांति पता है। हम उन्हें बताने वाले कौन होते हैं, उन्हें क्या और कैसे काम करना चाहिए। वे तजुर्बेकार लोग हैं। उन्हें अपनी जिम्मेदारी का पता है।
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उन्हें निर्देश देने वाले हम कौन होते हैं। पीठ ने दोटूक कहा कि हमें अपनी लक्ष्मण रेखा का पता है। हमें लक्ष्मण रेखा को कभी नहीं लांघना चाहिए।

वकील से ही जस्‍टिस दत्तू ने किए सवाल

We are no body to decide what MPs can do

इस तरह की याचिका अदालत के समक्ष लाए जाने पर आपत्ति जताते हुए चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश महरोत्रा से पूछा कि क्या आपने अपने हाउस(अदालत) को साफ रखा हुआ है।

जस्टिस दत्तू ने वकील से कहा कि आपको भले यह नहीं पता हो लेकिन चीफ जस्टिस होने के नाते मुझे यह पता है। वास्तव में चीफ जस्टिस का इशारा मद्रास हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ नारेबाजी और अदालत की कार्यवाही को अवरूद्ध करने की ओर था।

शीर्ष अदालत फाउंडेशन फॉर रिस्टोरेशन ऑफ नेशनल वैल्यू नामक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि संसद के अवरूद्ध होने से सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि संसद के पिछले छह सत्रों में 2162 घंटे संसद का कामकाज प्रभावित हुआ है।

पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन को स्पीकर के पास जाने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील ने पीठ के समक्ष राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा संसद के अवरूद्ध होने से संबंधित दिए वक्तव्य का भी जिक्र किया। इस पर पीठ ने कहा कि देश के पहले नागरिक सलाह दे चुके हैं। सांसद इस सलाह को गंभीरता से लेंगे।


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