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संसद में आसान नहीं महिला सुरक्षा कानून की राह
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
Updated Tue, 19 Feb 2013 12:49 AM IST
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संसद के बजट सत्र में महिला सुरक्षा पर सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश की राह आसान नहीं रहेगी। दरअसल, अध्यादेश के खिलाफ राजनीतिक विरोध सामने आने लगा है।
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एक तरफ जहां माकपा इसमें और कड़े प्रावधान की मांग कर रही है तो दूसरी तरफ सपा ने इसके दुरुपयोग की आशंका जताई है। सपा का कहना है कि अध्यादेश में कुछ ऐसे प्रावधान है जिनका गलत उपयोग हो सकता है। पार्टी संसद में अध्यादेश का विरोध करेगी और इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की मांग करेगी।
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राजधानी में 16 दिसंबर की गैंगरेप की घटना के बाद जनाक्रोश को देखते हुए सरकार ने महिला सुरक्षा कानून को सख्त बनाने के लिए जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। वर्मा समिति ने बलात्कार के दोषी को आजीवन कारावास की सिफारिश की थी। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर और कई सिफारिशें की गई थीं।
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सरकार कई सिफारिशों को शामिल करते हुए अध्यादेश मंत्रिमंडल से मंजूर करवा चुकी है। सरकार के अध्यादेश के मुताबिक अगर दुष्कर्म पीड़ित की मौत हो जाती है या फिर वह मरणासन्न हालत में पहुंच जाती है तो दोषियों को मौत की सजा दी जा सकेगी। अब सरकार इसे संसद से मंजूरी दिलाने की तैयारी में है।
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने इसका विरोध नहीं किया है, मगर माकपा के बाद अब सपा ने इसके खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया है। सपा ने केंद्र सरकार को इस मामले में जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी है। पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसे लेकर सरकार को गंभीर होना चाहिए।
सरकार को जल्दबाजी में ऐसा कानून नहीं बना देना चाहिए जिसका बाद में दुरुपयोग बढ़े और समस्या सुलझने के बजाय और उलझ जाए। उन्होंने कहा है कि अध्यादेश में कई खामियां दिखती हैं, जिन पर पुनर्विचार की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह सभी राजनीतिक दलों को इस पर विचार करने का वक्त दें। साथ ही इसे समीक्षा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेज देना चाहिए।