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बदल गया है मोदी के चुनाव प्रचार का अंदाज
राजकोट/भावनगर/एजेंसी
Updated Tue, 11 Dec 2012 12:38 PM IST
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गुजरात विधानसभा चुनावों में तीसरी बार जीत दर्ज करने उतरे नरेंद्र मोदी का अंदाज इस बार बदला-बदला है। उन्हें यकीन है कि तमाम आशंकाओं को धता बताते हुए इस बार भी जीत वही हासिल करेंगें।
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'देखो-देखो कौन आया, गुजरात का शेर आया', नरेंद्र मोदी जैसे ही किसी मंच पर चढ़ते हैं तो यही नारा गूंजता है। इसके बाद मोदी जनता की ओर 'विक्टरी' का संकेत करते हैं।
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आत्मविश्वास से लबरेज मोदी जैसे ही दर्शकों का अभिवादन करते हैं भारत माता के जयकारे से शुरू हो जाते हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव की तरह अब मोदी के मुखौटे चुनाव प्रचार में नहीं दिखते। 2007 के चुनाव में उनका यह प्रयोग बेहद सफल रहा था।
पांच साल बाद बदली परिस्थितियों के मद्देनजर मोदी के प्रचार का तरीका भी बदला है। वह गूगल प्लस और सोशल नेटवर्किंग साइटों का अधिक सहारा ले रहे हैं और नमो टीवी भी चला रहे हैं। इसके जरिए मोदी के भाषणों को गुजरात भर में पहुंचाने का प्रयास हो रहा है.
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मोदी की जनसभाओं और रैलियों में भी कमी नहीं आई है। वह धुआंधार चुनावी रैलियां कर रहे हैं और लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में पहुंच रहे हैं।
इतना ही नहीं 2007 की चुनावी रैलियों में वह जहां अपना भाषण 20 मिनट में समेट देते थे, वहीं इस चुनाव की लगभग हर सभा में घंटों भाषण दे रहे हैं। भाषण देने में वह पहले की ही तरह जनता से सीधा संवाद करते हैं।
मंच से भाषण देने के क्रम में मोदी का एक नया स्टाइल देखा जा रहा है। जब जनता का जोश थोड़ा कम होता है तो वह बाएं हाथ से दाहिनी हथेली पर अमिताभ बच्चन की तर्ज पर खुद से एक ताली भी बजाते हैं।
बीच-बीच में वह हाथों को सामने की ओर रखकर विभिन्न तरह की भावभंगिमाएं भी करते हैं।
मोदी के चुनावी भाषणों से इस बार '56 इंच का सीना' और 'मौत का सौदागर' जैसा 'वनलाइनर' गायब है।
इसी की तलाश में वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर बार-बार हमला बोलते हैं और उन्हें उकसाते दिखते हैं।
वह उन्हें दिल्ली की मांद से निकलकर गुजरात के चुनावी मैदान में तैयारियों के साथ उतरने की चुनौती भी देते हैं। सूरत में ऐसी ही एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मोदी कहते हैं, "मैडम सोनिया, मनमोहन सिंह और युवराज, गुजरात आने के डर से टेंशन में हैं।
टेंशन यह है कि कहीं भाषण देते वक्त उनकी जुबां से आड़ा-टेढ़ा शब्द न निकल जाए। इसलिए कांग्रेस के जो नेता भाषण भी दे रहे हैं तो उनके भाषणों की भी 15 बार स्क्रीनिंग हो रही है।"
मोदी अपने भाषणों में अपनी उपलब्धियां भी गिनाते हैं। जिस क्षेत्र में उनकी रैली होती है उस क्षेत्र में किए गए विकास कार्यो का वह जिक्र करते हैं और चुनाव जीतने के बाद क्या करेंगे, उसके बारे में भी लोगों को विस्तार से समझाते हैं।
मोदी के एक करीबी सहयोगी के मुताबिक वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन की सफलता के लिए मोदी ने जिस अंतर्राष्ट्रीय निजी पीआर एजेंसी को जिम्मा सौंपा था, वही कम्पनी उनके चुनाव-प्रचार का भी काम देख रही है. उनके अनुसार यह वही कम्पनी है जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पहले कार्यकाल के चुनाव प्रचार का जिम्मा सम्भाल रखा था।