10 साल बाद पानी के लिए आपस में लड़ेंगे लोग!
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एक नए अध्ययन के मुताबिक, मांग और पूर्ति के असंतुलन के चलते आज से 10 साल बाद वर्ष 2025 में भारत पानी की भारी किल्लत से जूझेगा। माना जा रहा है कि वाटर सेक्टर अगले कुछ वर्षों में विदेशी निवेश के जरिए करीब 13 अरब डॉलर का निवेश होगा।
अध्ययन के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में भारत में पानी की मांग वर्तमान में आपूर्ति के उपलब्ध सभी स्रोतों से कहीं ज्यादा हो जाएगी और 2025 तक भारत पानी की भारी कमी से जूझेगा।
पानी के क्षेत्र की अग्रणी सलाहकार कंपनी ईए वाटर की ओर से कराए गए अध्ययन के मुताबिक, ‘परिवारों की आय तथा सेवा और औद्योगिक क्षेत्र के योगदान में बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप औद्योगिक और घरेलू क्षेत्र में पानी की मांग में बेतहाशा वृद्धि होगी।’
लगातार नीचे जा रहा है जल स्तर
देश में सिंचाई का 70 और घरेलू इस्तेमाल का 80 फीसदी पानी लगातार नीचे जा रहे भूमिगत जल से हासिल किया जाता है। देश के घरेलू पानी क्षेत्र में अगले कुछ वर्षों में कनाडा, इस्राइल, जर्मनी, इटली, अमेरिका, चीन और बेल्जियम के जरिए करीब 13 अरब डॉलर का निवेश किए जाने की संभावना है।
यही नहीं अगले तीन वर्षों में देश में करीब 18,000 करोड़ का निवेश पानी के क्षेत्र में आने की उम्मीद है। महाराष्ट्र इस वक्त पानी क्षेत्र के हब के तौर पर उभर रहा है। यहां एक हजार से ज्यादा छोटी बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं।
मोदी सरकार की ओर से गंगा की सफाई और स्मार्ट सिटी परियोजना और स्वच्छ भारत अभियान में भारी निवेश से भी इस क्षेत्र में करीब 10 लाख नौकरियों के अवसर पैदा होने की उम्मीद की जा रही है।