BJP के दिग्गज नेताओं पर आई आफत, वारंट जारी
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कवाल कांड को लेकर नंगला मंदौड़ में बुलाई गई 31 अगस्त की पंचायत के मुकदमों में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, बिजनौर सांसद भारतेंद्र सिंह, विधायक सुरेश राणा और विहिप नेत्री साध्वी प्राची के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर दिए हैं। एसीजेएम द्वितीय सीताराम की कोर्ट ने मुकदमों के आरोपियों को दो और तीन नवंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
जानसठ कोतवाली के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन एवं गौरव और कवाल के शाहनवाज की हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद जिले में फैले सांप्रदायिक तनाव के बीच उसी रात तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला कर दिया गया। कवाल कांड को लेकर सियासी पार्टियां और धार्मिक संगठन सक्रिय हो गए।
दूसरे समुदाय के लोगों ने 30 अगस्त को खालापार में जुमे की नमाज के बाद सभा की थी, जिसमें तत्कालीन डीएम कौशलराज शर्मा और एसएसपी सुभाष दूबे को मंच पर बुलाकर ज्ञापन सौंपा गया था। उपजे तनाव में प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद हिंदू संगठनों ने 31 अगस्त 2013 को नंगला मंदौड़ में पंचायत की।
भाजपा नेताओं ने पंचायत का मंच संभाल लिया था। पुलिस प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा तोड़ने और भड़काऊ भाषण देने आदि की धाराओं में पंचायत में शामिल नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से दो मुकदमे एसीजेएम द्वितीय सीताराम की कोर्ट में विचाराधीन हैं।
धारा 188, 353, 341 के तहत मुकदमे दर्ज
कोर्ट ने केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, बिजनौर के भाजपा सांसद भारतेंद्र सिंह, थानाभवन के विधायक सुरेश राणा, उमेश मलिक, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कुतुबपुर समेत आठ के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं, जिन्हें दो नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं।
कोर्ट ने तीन नवंबर को दूसरे मुकदमे में विहिप नेत्री साध्वी प्राची आर्य, पूर्व चेयरमैन श्यामपाल, पिंटू आदि को पेश होने को कहा है। इन सभी पर पुलिस की ओर से धारा 188, 353, 341 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे।
दो साल पहले नंगला मंदौड़ और खालापार में हुई पंचायतों के बाद ही मुजफ्फरनगर में हिंसा भड़की थी। 31 अगस्त को पंचायत के बाद नंगला मंदौड़ में सात सितंबर को दूसरी महापंचायत की गई थी। पंचायत खत्म होते-होते जिले में दंगा भड़क उठा था। दंगा अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बना और आग वेस्ट यूपी में फैल गई थी।
मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा में 60 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हुई। 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए। दंगे को लेकर देश की सियासत में हलचल मच गई थी। दंगों के मामलों में दर्ज मुकदमों में ट्रायल चल रहा है।