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'रिटेल में एफडीआई मंजूरी को वॉलमार्ट ने की लॉबिंग'

Fri, 12 Oct 2012 06:56 PM IST
नई दिल्ली/राम शंकर/अवनीश
नई दिल्ली/राम शंकर/अवनीश Updated Fri, 12 Oct 2012 06:56 PM IST
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walmart lobbied for approval of fdi in retail says joshi
मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी विदेशी निवेश संबंधी सरकार के फैसले का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि वॉलमार्ट ने रिटेल में एफडीआई संबंधी नीतिगत फैसले लागू करवाने के लिए जबरदस्त लॉबिंग की। इस लॉबिंग में वॉलमार्ट ने करीब 53 मिलियन डॉलर की राशि खर्च की है।
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'अमर उजाला मंथनः रिटेल में एफडीआई' कार्यक्रम में जोशी ने कहा कि रिटेल में एफडीआई लागू करने से आम लोगों की रोजी रोटी पर बुरा असर पड़ेगा। इससे केवल वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों की जेबें ही भरेंगी। जोशी ने कहा कि सरकार दलील दे रही है कि इससे देश में रोजगार बढ़ेंगे। यदि यह सच है तो फिर ये कंपनियां अपने देश में ही लोगों को रोजगार क्यों नहीं दे रही हैं? अमेरिका में बेरोजगारी विकट समस्या बन गई है। ऐसे में वॉलमार्ट भारत के बजाय अमेरिकी में स्टोर क्यों नहीं खोलती?
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जोशी ने कहा कि अभी तक रिटेल में एफडीआई को लेकर केवल सरकार और अन्य बड़ी कंपनियों का रुख ही सामने आया है। यदि सच में सरकार इस मसले पर गंभीर है तो फिर आम लोगों के बीच इस पर बहस क्यों नहीं कराती? जिन लोगों पर इसका असर पड़ेगा उनका राय क्यों नहीं लेती?
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हालांकि कार्यक्रम में कृषि व खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री हरीश रावत ने सरकार के फैसले का बचाव किया। रावत ने कहा कि हर साल करीब 30-40 फीसदी अनाज बर्बाद हो रहा है। पिछले कुछ सालों से कृषि विकास दर नीचे जा रही है। ऐसे में यदि हमें किसानों के बारे में सोचना है तो रिटेल में एफडीआई जैसे फैसले लेने ही होंगे। सरकार ने आगामी पंचवर्षीय योजना में 4 फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा है। सरकार को उम्मीद है कि रिटेल में एफडीआई लागू करने से किसानों के अलावा आम लोगों को भी लाभ मिलेगा।


वहीं अमूल के जनरल मैनेजर जयेन मेहता ने कहा कि सरकार को किसानों का पक्ष भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि क्यों न हम ऐसी नीति बनाए जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले। वहीं भारतीय किसान यूनियन के राकेश सिंह टिकैत ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया। टिकैत ने कहा कि वे अपने साथियों के साथ 18 मार्च को नई दिल्ली में आंदोलन करेंगे।
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