भारत में बिजनेस करने को वालमार्ट ने दी रिश्वत
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अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी वालमार्ट भारत में कारोबार की शुरुआत के लिए कथित तौर पर हजारों बार छोटी-छोटी राशि रिश्वत के तौर पर दे चुकी है।
सोमवार को वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी खबर के मुताबिक अमेरिकी सरकार की जांच में वालमार्ट स्टोर्स इंक के खिलाफ इस आरोप के समर्थन में सबूत भी मिले हैं कि सीमा शुल्क विभाग से सामानों की अनुमति लेने और रियल एस्टेट परमिट पाने के लिए इसने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी।
दिलचस्प बात यह है कि रिश्वत के तौर पर दी जाने वाली ज्यादातर राशि 200 डॉलर (वर्तमान विनिमय दर के हिसाब से लगभग 13,000 रुपये) से कम थी और कुछ मामलों में तो यह पांच डॉलर यानी लगभग 330 रुपये ही थी। हालांकि, कुल मिलाकर रिश्वत की राशि करोड़ों डॉलर होने का अनुमान जताया जा रहा है।
रियल एस्टेट परमिट के लिए वालमार्ट ने दी रिश्वत
जर्नल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि तीन साल से चल रही जांच में इस बात के सबूत मिले हैं कि भारतीय अधिकारियों को वालमार्ट ने रिश्वत दी है जो कई स्थानीय अधिकारियों को छोटी-छोटी राशि के भुगतान करने पर केंद्रित है।
उल्लेखनीय है कि 2007 में एक सुपरमार्केट संयुक्त उद्यम के जरिये वालमार्ट ने भारती एंटरप्राइजेज के साथ भारत में कदम रखा था लेकिन 2013 में वालमार्ट इस संयुक्त उद्यम से अलग हो गई।
वाल स्ट्रीट जर्नल ने कहा है कि जांचकर्ताओं ने रिश्वत के ऐसे ही भुगतान मेक्सिको में भी पाए हैं लेकिन ऐसी ज्यादातर गतिविधियां भारत में ही पाई गईं हैं।
संपर्क करने पर वालमार्ट इंडिया के उपाध्यक्ष और कारपोरेट मामलों के प्रमुख रजनीश कुमार ने कहा कि हम शुरुआत से ही कह रहे हैं कि हम इस मामले में सरकार के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और इस प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वालमार्ट अमेरिकी फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट का पालन करता है।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2012 में तत्कालीन भारती-वालमार्ट ने पांच लोगों को निलंबित कर दिया था जिनमें तत्कालीन सीएफओ पंकज मदान भी शामिल थे।