वाघा परेड: ऊंची नाक के लिए टूटते घुटने, क्या है वजह?
इसे देखने के लिए सीमा के दोनों ओर सैकड़ों लोग जमा होते हैं। यह उनके लिए काफी रोमांचक क्षण होता है और वे अपने-अपने देश के सैनिकों का हौसला भी बढ़ाते हैं। जोर-जोर से पैर पटकने और अपने पैरों को काफी ऊंचाई तक उठाने से सैनिकों के घुटनों पर जोर पड़ता है। कई बार उनके पैरों में चोट भी लग जाती है। अमृतसर के अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अवतार सिंह ने बीबीसी को बताया कि पैर में चोट लगने के बाद कई बार सैनिकों को इलाज के लिए उनके अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
डॉक्टर अवतार सिंह कहते हैं, "एक सैनिक जब अपने पैर काफी ऊंचाई तक उठाने के बाद उसे तेजी से जमीन पर पटकता है तो उसका पैर टूटने की काफी आशंका होती है। उसके घुटने खराब भी हो सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि ड्रिल के दौरान सैनिकों के पांव में मोच आना आम बात है।
रबड़ की सड़क?
इस तरह के लक्षणों को डॉक्टरी भाषा में 'पटेलो फीमोरल पेन', 'टिबियल स्ट्रेस फ्रैक्चर' और 'इलियोटिबियल बैंड सिंड्रम' कहते हैं। इस तरह की समस्याएं ज्यादा दौड़ने, साइकिल चलाने, पहाड़ पर चढ़ने, ऊंचाई से तेजी से जमीन पर पांव पटकने और मिलिट्री ड्रिल से होती हैं।
कुछ सैनिकों के घुटने के जोड़ खराब हो गए और कुछ की रीढ़ की हड्डी में तकलीफ हुई। इस ड्रिल में भाग लेने वाले बीएसएफ के एक जवान ने बीबीसी को बताया कि किसी सैनिक को चोट लगने पर उसे कुछ समय के लिए छुट्टी मिल जाती है और उसकी जगह दूसरा आ जाता है।
वे कहते हैं कि हर 10 दिन में एक-दो जवान घायल होते हैं। इसके साथ ही वे यह भी कहते हैं कि यह ड्रिल उनकी नौकरी का एक हिस्सा है और उन्हें इसमें भाग लेने से कोई गुरेज नहीं है।
'ड्यूटी का हिस्सा'
बीएसएफ के जवान का यह भी मानना है कि जब सीमा पर जुटे लोग तालियां बजाते हैं और नारे लगाते हैं तो उनका मन खुश हो जाता है। उन्हें लगता है मानो पुरस्कार मिल गया हो। डॉक्टरों ने सेना को सलाह दी है कि सीमा पर जिस जगह यह ड्रिल होती है, वहां रबड़ की सड़क बनवा दी जाए। ऐसा होने से सैनिकों को चोट नहीं लगेगी।
पंजाब फ्रंटियर के इंस्पेक्टर जनरल अनिल पालीवाल का तर्क है कि हर देश की सेना इस तरह के ड्रिल करती है। यह उनकी ड्यूटी का हिस्सा है। वे यह भी कहते हैं कि एक ही टीम साल भर वाघा पर नहीं रहती है, उनकी ड्यूटी बदलती रहती है। इसलिए किसी एक सैनिक या टुकड़ी पर ही सारा दबाव नहीं होता है।
बाघा-अटारी सीमा पर दर्शकों की सुविधा के लिए नई गैलरी बनाई जा रही है जो वर्ष 2016 तक पूरी हो जाएगी। लेकिन सड़क को मुलायम बनाने के लिए कुछ करने की योजना नहीं है।