EXCLUSIVE: वाराणसी से भी जुड़े व्यापमं घोटाले के तार
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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और हाईप्रोफाइल व्यापमं घोटाले के तार वाराणसी से भी जुड़ गए हैं। इंदौर की स्पेशल पुलिस टीम ने वाराणसी पहुंचकर बीएचयू के एक छात्र अजय यादव को गिरफ्तार किया है। इसने मप्र प्रीपीएमटी-2013 में एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए ठेका लिया था और पटना के एक युवक को सॉल्वर के तौर पर बैठाया था। फर्जी तरीके से एडमिशन के मामले खुलने के बाद इंदौर पुलिस अजय तक पहुंच गई।
मध्य प्रदेश के व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित होने वाली प्रीपीएमटी परीक्षा घोटाले की जड़ें तलाशते बुधवार की रात इंदौर पुलिस की एक स्पेशल टीम ने वाराणसी में छापा मारा। टीम ने सारनाथ के फरीदपुर गांव निवासी 22 वर्षीय अजय यादव पुत्र रमेश यादव को गिरफ्तार कर लिया। अजय बीएचयू में बीएससी तृतीय वर्ष में पढ़ाई करने के साथ ही कोचिंग भी पढ़ाता है। वहीं उसके पिता गांव में ही एक स्कूल का संचालन करते हैं।
इंदौर से वाराणसी पहुंची पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस की मदद के ही आरोपी अजय को कोचिंग से उठा लिया और अपने साथ लेकर चली गई। इस पूरे मामले में वाराणसी पुलिस को अब तक कोई भनक नहीं है। हालांकि बीएचयू प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई थी। कार्यवाहक जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि बीएचयू प्रशासन को इसकी जानकारी थी और नियमानुसार सहयोग किया गया।
सॉल्वर से स्कोरर बन गया अजय
इंदौर पुलिसस्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के डिप्टी एसपी सलीम खान ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि अजय इस पूरे फर्जीवाड़े में पहले सॉल्वर था और अब स्कोरर का काम करता है। वर्ष 2013 में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रविंद्र जाटव के एडमिशन के लिए पटना कॉलेज के विक्रांत को सॉल्वर बनाया। इस काम के लिए उसे 4.50 लाख रुपए मिले थे। इसमें सॉल्वर को एक लाख रुपए दिए गए। उसके तार ग्वालियर के रैकेटियर डॉ. ज्ञान सिंह और उसके चेले डा. नरेंद्र चौरसिया से जुड़े हैं।
यह दोनों आरोपी यूपी के विभिन्न जिलों से होनहार युवकों को सॉल्वर के तौर पर तलाश करने का काम करते हैं। अजय रैकेटियर नरेंद्र के सम्पर्क में वर्ष 2010 में आया। उस साल वह नरेंद्र के भांजे दीपक के लिए मप्र प्रीपीएमटी की परीक्षा में सॉल्वर बना था। जिसके लिए उसे एक लाख रुपए मिले थे। बाद में वह सॉल्वर मुहैया कराने का ठेका लेने लगा। पुलिस के मानना है कि घोटाले की जड़ें वाराणसी के अलावा इलाहाबाद, शाहजहांपुर, लखनऊ और झांसी में भी फैली हुईं हैं।
भेलूपुर के सीओ शालिनी ने बताया कि हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वहां की पुलिस ने अधिकारिक तौर पर हमसे कोई सहयोग नहीं मांगा था।