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कांग्रेस ने वीके सिंह से मांगा इस्तीफा

Wed, 25 Mar 2015 08:48 AM IST
Updated Wed, 25 Mar 2015 08:48 AM IST
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VK singh target on BJP-congress

पाकिस्तानी उच्चायोग में आयोजित समारोह में शामिल होने पर विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह के नाराजगी भरे ट्वीट ने पाकिस्तान के मोर्चे पर मोदी सरकार की किरकिरी करा दी। इस मामले पर हुई फजीहत के बाद सरकार और भाजपा वीके सिंह से बेहद नाराज है।

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पूरे मामले में दांव उल्टा पड़ने और ट्वीट में सिंह की ओर से चयनित शब्दों से भी सरकार हैरान है। नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हुर्रियत नेताओं को न्योता देने पर सोमवार को दिनभर पाकिस्तान को कोसने वाली भाजपा ने मंगलवार को इस मामले में कोई टिप्पणी करने से ही इनकार कर दिया।
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भाजपा ने सोमवार को पाकिस्तान को अपने उच्चायोग में अराजक तत्वों को एकत्र न करने की नसीहत दी थी तो विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र की याद दिलाते हुए दोनों देशों के बीच तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया था।
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दरअसल भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर हमला और बधाई देने का सिलसिला एक साथ जारी रखने की रणनीति बनाई थी। भारत यह संदेश देना चाहता था कि वार्ता का वातावरण बनने की संभावना के बीच पाकिस्तान फिर से हुर्रियत नेताओं को न्योता देकर माहौल खराब करना चाहता है।

सिंह ने पटरी से उतारी सरकार की योजना

VK singh target on BJP-congress

इसी रणनीति के तहत एक ओर जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को सभी मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने के संदेश के साथ राष्ट्रीय दिवस पर बधाई संबंधी पत्र लिखा था, वहीं विदेश मंत्रालय और भाजपा पाकिस्तान पर सीधा हमला कर रहे थे।

इसी रणनीति के तहत वीके सिंह को समारोह में शामिल होने को कहा गया था। सरकारी सूत्रों ने बताया कि कूटनीतिक मोर्चे पर सिंह के भावनात्मक रुख अपनाने से न केवल सरकार असहज बल्कि बेहद नाराज भी है। सेना प्रमुख रह चुके सिंह कूटनीति के मर्म को समझने के बदले भावनाओं में बह गए।

खासतौर से उनके ट्वीट से यह संदेश गया कि भारत भी पाकिस्तान से वार्ता करने के मामले में असहज है। उल्लेखनीय है कि पहले पाकिस्तानी उच्चायोग में आयोजित समारोह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को जाना था। बाद में महज उपस्थिति दर्ज कराने का संदेश देने के लिए समारोह में सिंह को भेजने की योजना बनी।

सिंह ने ट्वीट के माध्यम से अपनी परोक्ष नाराजगी तब भी जाहिर की जब उन्हें समारोह में महज चंद मिनट गुजारने का निर्देश दिया गया था। सिंह के भावना से बहने से हुए कूटनीतिक नुकसान के कारण सरकार और भाजपा दोनों में गहरी नाराजगी है।

विवाद के बाद दी सिंह ने सफाई

VK singh target on BJP-congress

अपने ट्वीट पर विवाद बढ़ने के बाद विदेश राज्यमंत्री ने अपनी सफाई दी और सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समारोहों में शामिल होने की पुरानी परंपरा रही है। ऐसे कार्यक्रमों में पहले भी हुर्रियत नेता शरीक होते रहे हैं।

मुझे सरकार ने वहां भेजा और मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। इस दौरान मैंने हुर्रियत नेताओं के साथ कोई बातचीत नहीं की। साथ अपने ट्वीट पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी को स्पष्टीकरण नहीं देना है।

वहीं विवाद के चरम पर पहुंचने के बाद मंगलवार को उनके इस्तीफे की पेशकश करने की अटकलें लगाई गईं। हालांकि खुद सिंह ने इसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर आयोजित समारोह में शिरकत कर उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई। सिंह ने यह भी कहा कि समारोह में शिरकत करना नई नहीं बल्कि पुरानी परंपरा है।

कांग्रेस ने की सिंह को बर्खास्त करने की मांग

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पाकिस्तानी उच्चायोग में कश्मीरी अलगाववादी नेताओं की मौजूदगी के बीच विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह की शिरकत को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने सिंह की मौजूदगी और उसके बाद उनके ट्वीट को निंदाजनक बताते हुए सरकार से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है।

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार की पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर नीति स्पष्ट नहीं है। मोदी सरकार इन मुद्दों से निपटने में नाकाम रही है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इतने गंभीर मामले को सरकार ने मजाक बना दिया।

सरकार का एक मंत्री जो समारोह में गया और फिर उसने अपनी ही सरकार की आलोचना कर दी। उन्होंने कहा कि वीके सिंह ने पहले खुद को समारोह में भेजने के लिए सरकार की निंदा की और जब उन्हें लगा कि उनकी कुर्सी खतरे में है तो उन्होंने सफाई दी कि वह सरकार की नहीं बल्कि मीडिया की निंदा कर रहे थे।

सिंघवी ने कहा कि सरकार की पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर नीतियां मिनटों में बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सेनाध्यक्ष को लेकर कोर्ट के एक मामले में पहले भी सिंह सरकार के खिलाफ जा चुके हैं। इसलिए अब उनको इस मामले के बाद पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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