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वीके सिंह ने बढ़ाई मोदी सरकार की मुश्किलें

Wed, 11 Jun 2014 05:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 11 Jun 2014 05:53 PM IST
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VK Singh's affidavit controversy grew in trouble

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह अपनी ही सरकार के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। हलफनामा विवाद में कांग्रेस समेत सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा मांगा है।

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ये विवाद सोमवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करने के बाद सामने आया। जिसमें साल 2012 में सेना प्रमुख के तौर पर वीके सिंह की ओर से की गई कार्रवाई को अवैध और पूर्वनियोजित बताया था।
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उस समय वीके सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल रहे दलबीर सुहाग के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी। हालांकि दलबीर सुहाग को यूपीए सरकार ने जाते-जाते आर्मी चीफ बना दिया। वह 31 जुलाई को रिटायर हो रहे जनरल बिक्रम सिंह की जगह लेंगे।

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विवाद पर बोले रक्षा मंत्री

VK Singh's affidavit controversy grew in trouble

जहां केंद्रीय मंत्री वीके सिंह दलबीर सुहाग को आर्मी चीफ बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार ने साफ कर दिया है कि अगले सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ही होंगे।

केंद्रीय रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने सुहाग की नियुक्ति के फैसले को आखिरी बताया है। साथ ही उन्होंने सैन्य बलों से जुड़े मुद्दों को राजनीति से अलग रखने की अपील की है।

इसके साथ ही रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से जवाब तलब किया है। उन्होंने रक्षा सचिव से इस संबंध में जानकारी मांगी है।

क्या है पूरा विवाद?

VK Singh's affidavit controversy grew in trouble

पूरा मामला साल 2012 का है। जब सेना प्रमुख के तौर पर वीके सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी और उनके प्रमोशन को बैन कर दिया था।

वीके सिंह के रिटायरमेंट के बाद जनरल बिक्रम सिंह सेना प्रमुख बने और उन्होंने इस बैन को हटा दिया। आर्मी कमांडर के इसी प्रमोशन के खिलाफ लेफ्टिनेंट जनरल रवि दास्ताने ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

दास्ताने का कहना है कि इस पोस्ट के लिए वह उपयुक्त उम्मीदवार थे, लेकिन जनरल बिक्रम सिंह ने पक्षपात करते हुए सुहाग को प्रमोट कर दिया, जबकि उस वक्त उन पर अनुशासनात्मक प्रतिबंध लगा हुआ था।

इस याचिका में अप्रैल और मई 2012 में तत्कालीन जनरल वीके सिंह के उनके खिलाफ की गयी जांच का भी जिक्र किया गया। बाद में इस मामले में रक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में जनरल वीके सिंह की कार्रवाई को निराधार करार दिया गया।

वीके सिंह ने ट्वीट कर दी सफाई

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हालांकि वीके सिंह ने जनरल के तौर पर की गई अपनी कार्रवाई को न सिर्फ सही बताया है कि बल्कि आने वाले जनरल दलबीर सुहाग के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में ट्विटर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग के खिलाफ उस समय की गई कार्रवाई को सही करार दिया।

रिटायर्ड जनरल ने अपने ट्वीट में लिखा, "अब सरकार ने जो हलफनामा दिया है, वह पिछली सरकार का बनाया हुआ है और पिछली सरकार की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण थी।"

जनरल ने अपनी सफाई में कहा, "अगर कोई यूनिट बेगुनाहों की हत्या करती है, लूटपाट करती है और उसके बाद संगठन का प्रमुख उन्हें बचाने का प्रयास करता है, तो क्या उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए? अपराधियों को खुला घूमने दिया जाए?"

जहां एक ओर वीके सिंह ने इस मामले में अपनी सफाई दे रहे हैं। दूसरी ओर हलफनामे को लेकर अब कांग्रेस ने वीके सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर वीके सिंह से इस्तीफे की मांग कर दी है।

कांग्रेस ने की इस्तीफे की मांग

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इसकी कांग्रेस नेता मनु सिंघवी ने की। उन्होंने कहा, "जिस मंत्री पर अपनी सरकार को ही भरोसा नहीं है, जैसा रक्षा मंत्रालय के हलफनामे से साफ है, तो वह मंत्री सरकार में नहीं रह सकता, इसलिए वीके सिंह को इस्तीफा दे देना चाहिए।"

इसके बाद ये मामला संसद में उठाया गया। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह ने लोकसभा में ये मुद्दा उठाया और वीके सिंह के इस्तीफे की मांग कर दी।

हलफनामा विवाद में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछली सरकार में बनाये गये हलफनामे को क्यों और कैसे नयी सरकार ने कोर्ट में पेश किया, इस बात की जानकारी रक्षा मंत्री अरुण जेटली को भी नहीं थी। उन्होंने रक्षा सचिव से इस संबंध में जानकारी मांगी है। हालांकि इस मामले में सरकार की किरकिरी जरूर हुई है।

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