{"_id":"d4df343c-255e-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"vk-singh-on-front-foot-in-new-team-anna","type":"story","status":"publish","title_hn":"अन्ना के नए 'केजरीवाल' बने जनरल सिंह","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
अन्ना के नए 'केजरीवाल' बने जनरल सिंह
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 03 Nov 2012 08:03 AM IST
विज्ञापन
अन्ना हजारे और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन से झलक मिल रही है कि सिंह ने पुरानी टीम अन्ना के अरविन्द केजरीवाल का स्थान ले लिया है। सम्मेलन के दौरान सिंह ने अन्ना से पूछे गए कई सवालों का जवाब दिया और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की नई नीतियों के बारे में बताया।
विज्ञापन
वह अन्ना हजारे से पूछे जा रहे टेढ़े सवालों का स्वयं जवाब दे रहे थे और खुद अपनी ओर से सफाई दे रहे थे। हजारे भी सेना में रहे हैं और पूरे देश की यात्रा करने की योजना की घोषणा के वक्त जनरल के लिए उनका सम्मान देखा जा सकता था।
विज्ञापन
हजारे ने कहा, हम सिर्फ दो लोग नहीं हैं। हमारे आंदोलन के समर्थन में लाखों और करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आएंगे। जनरल सिंह ने कहा, 'वर्तमान सरकार ने पूरी तरह से संविधान की आत्मा का उल्लंघन किया है। संविधान के भाग चार, राज्य के नीति निर्देशक तत्वों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि विपक्षी भी इस मुद्दे पर चुप हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यहां सवाल यह उठता है कि संविधान के मूल दर्शन को नजरअंदाज करने का अधिकार किसने दिया है? सरकारी नीतियां गरीबों की बेहतरी के लिए होनी चाहिए लेकिन किसी भी तरह इन्हें निजी कंपनियों के लिए लाभदायी बनाया जा रहा है। संसद में कोई इन नीतियों पर सवाल नहीं उठा रहा है।
जानिए, जनरल वी.के सिंह को
कमांडो की ट्रेनिंग लेने वाले पहले आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह जब फौज में थे, तब मुश्किल से मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम देने का जिम्मा उन्हें ही मिलता था। पीढ़ियों से रगों में उबाल मारता फौजी खून पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह की पहचान है।
हरियाणा के भिवानी जिले में जन्मे वी के सिंह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी से आते हैं, जिसने फौज की शोभा बढ़ायी। जनरल के पिता आर्मी में ही कर्नल थे और दादा जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर। जवानों से उनका ये लगाव तब भी छलक उठता है, जब वो किसानों की बात करते हैं।
19 साल की उम्र में वी के सिंह राजपूत रेजिमेंट में शामिल हुए और अगले साल यानी 1971 में बांग्लादेश के युद्ध में भाग लिया। अब यही जनरल भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं के खिलाफ मैदान में उतर आया है।