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सिनेमा एक्ट की समीक्षा को कमेटी गठित
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 04 Feb 2013 07:10 PM IST
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हाल ही में विश्वरूपम को लेकर उठे विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार सिनेमेटोग्राफ अधिनियम की फिर से समीक्षा करने के पक्ष में है ताकि कोई भी फिल्म सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद अटके नहीं।
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इसी उद्देश्य को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक 8 सदस्यीय न्यायिक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का नेतृत्व पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस मुकुल मुद्गल करेंगे। इस कमेटी में बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और लेखक व सांसद जावेद अख्तर को भी शामिल किया गया है।
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विश्वरूपम को सेंसर बोर्ड से क्लीयरेंस मिलने के बावजूद तमिलनाडु में जयललिता सरकार ने बैन कर दिया था। पिछले हफ्ते सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा था कि एक्ट की फिर से समीक्षा करने की जरूरत है ताकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाण पत्र मिलने के बावजूद किसी फिल्म के भविष्य पर तलवार न लटके।
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संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र के पास यह शक्ति है कि फिल्म को प्रदर्शित होने के लिए फिट या अनफिट घोषित कर सकता है। केंद्र सरकार इसी शक्ति का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।