काशी विश्वनाथ मंदिर में कोई ड्रेसकोड नहीं: न्यास परिषद
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काशी विश्वनाथ मंदिर में विदेशी महिलाओं के लिए ड्रेसकोड नहीं चलेगा। सोमवार को ऐसे किसी फैसले से न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि मंदिर में ड्रेसकोड लागू करने के मामले में तमाम तरह की खबरें मीडिया में आ रही हैं, जो बेबुनियाद हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी पुरुष हों या महिलाएं पुरानी व्यवस्था के तहत नौबतखाने पर चढ़कर सिर्फ स्वर्ण शिखर का दर्शन कर सकते हैं। अब बाबा के दरबार में हवन के साथ ही आरती हो सकेगी। बेल्ट पहन कर मंदिर में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है।
'हवन और आरती की नई व्यवस्था लागू'
न्यास परिषद के अध्यक्ष ने यह जानकारी सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में दी। रवींद्रपुरी स्थित अपने आवास पर उन्होंने बताया कि मंदिर की दीवार पर पहले से ही हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में पट्टिका लगाई गई है।
उस पर संस्कृत में लिखा है कि-आर्य धर्मेतराणाम प्रवेशो निषिद्ध:। इसका मतलब है कि आर्य धर्म से इतर कोई भी धर्मावलंबी इस मंदिर में स्वयं प्रवेश न करे।
उन्होंने बताया कि तमाम विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। वह विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए नहीं, बल्कि देखने के लिए आते हैं। ऐसे विदेशी आते हैं तो वह नौबतखाने पर चढ़कर सिर्फ शिखर का दर्शन कर सकते हैं। अगर कोई गाइड या पंडा मंदिर में विदेशियों को प्रवेश कराता है तो वह नियम के विरुद्ध है।
गैर हिंदू धर्मावलंबी को प्रवेश न कराने की है प्राचीन परंपरा
विदेशी महिलाओं के लिए भारतीय साड़ी पहनकर मंदिर आने जैसा ड्रेस कोड लागू होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है। मंदिर में विदेशी महिलाओं के लिए साड़ी रखने या साड़ी पहनकर आने के लिए बाध्य करने जैसी कोई नई परंपरा विकसित नहीं होने जा रही है। हां, इतना जरूर है कि अगर कोई विदेशी महिला या पुरुष बाबा के नौबतखाने पर भी चढ़ता है तो उसे कम कपड़े में नहीं होना चाहिए।
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने कहा कि विश्वनाथ मंदिर में विदेशी महिलाओं के लिए ड्रेसकोड लागू नहीं किया गया है। इस तरह का भ्रामक प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। विदेशी महिलाओं को भारतीय परिधान में मंदिर आने जैसा कोई निर्णय नहीं किया गया है।