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वीरभद्र की जिद ने दिलाई हिमाचल में शानदार जीत

Thu, 20 Dec 2012 08:50 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 20 Dec 2012 08:50 PM IST
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virbhadra Singh Insistence of congress victory in himachal

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को जीत दिलाने के लिए चुनाव पूर्व यदि वीरभद्र सिंह ने जिद करके पार्टी आलाकमान से बागडोर अपने हाथ में न ली होती तो नतीजे कुछ और होते। राज्य में कांग्रेस की जीत सही मायने में वीरभद्र की लोकप्रियता व पार्टी में संगठन के नेतृत्व के लिए उनकी जिद है। वहीं भाजपा आंतरिक गुटबाजी को न केवल रोकने में विफल रही बल्कि असंतुष्टों ने बगावत कर पार्टी को ही नुकसान पहुंचाया।

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प्रदेश के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते चुनाव से पहले न केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिए गए थे बल्कि विरोधी गुट के नेताओं ने उन्हें राज्य की राजनीति में हाशिये पर डालने का फैसला ले लिया था। इसमें किसी हद तक पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी शामिल था। उस समय हिमाचल में पार्टी के अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर, विद्या स्टोक्स, आनंद शर्मा तथा उनके गुट से जुड़े लोगों ने टिकट बंटवारे में भी सिंह को दरकिनार करने का प्रयास किया।
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हिमाचल में बड़े जनाधार वाले नेता माने जाने वाले वीरभद्र ने पहले केंद्रीय नेतृत्व तथा प्रदेश के प्रभारी चौधरी बीरेंद्र सिंह से बातचीत की लेकिन बात बनती न देख वे दिल्ली में अपने समर्थकों के साथ डट गए थे। उस समय चर्चा थी कि यदि उन्हें चुनाव की बागडोर न दी गई तो वे पार्टी से अलग राह पकड़ सकते हैं। इसके बाद न केवल कौल सिंह ठाकुर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया बल्कि वीरभद्र सिंह को अध्यक्ष नियुक्त किया गया और टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार सभी में उनकी ही चली।
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देर से ही सही प्रदेश अध्यक्ष बनने तथा चुनाव की बागडोर संभालने के बाद वीरभद्र ने प्रदेश में सत्तारूढ़ धूमल सरकार पर न केवल जमकर हमले किए बल्कि चुनाव के दौरान महंगाई तथा केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी पीछे धकेलने सफल रहे। दूसरी ओर भाजपा अपने अंतर्विरोधों में अंतिम समय तक उलझी रही।


सरकार से नाराज भाजपा के नेता अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे। चुनाव से पहले बगावत कर उन्होंने कई स्थानों पर कांग्रेस की राह भी आसान कर दी। शांता कुमार भले ही सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला लेकिन लगातार राज्य सरकार के कामकाज पर उंगली उठाने में भी नहीं पीछे रहे। उनके समर्थकों मुख्यमंत्री व उनके नजदीकियों के खिलाफ खुली बगावत कर दी।

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