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जेब में सौ रुपए है तो यहां मिलेगी लालबत्ती

Mon, 30 Dec 2013 12:39 PM IST
हरीश लखेड़ा/दिल्ली
हरीश लखेड़ा/दिल्ली Updated Mon, 30 Dec 2013 12:39 PM IST
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Vip culture in delhi

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लालबत्ती वाली गाड़ी व सुरक्षा घेरा लेने से इनकार करने की पहल कर अन्य राज्यों में भी लालबत्ती, गनर व हूटर के ‘आतंक’ से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बांध दी है।

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दिल्ली की सीमा से बाहर निकलते ही सांसदों, विधायकों, दर्जाधारी मंत्रियों से लेकर सत्ताधारी दलों के छुटभैया नेताओं के वाहन लालबत्ती के साथ हूटर से भी लैस होते हैं। जबकि नेताजी के पीछे स्टेनगन लिए गनर खड़ा दिख जाता है।
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यह सब इसलिए है कि लालबत्ती, गनर व हूटर ‘नेताजी‘ के लिए स्टेटस सिंबल बन चुके हैं, और लालबत्ती तो मात्र 100  से 150 रुपये में उपलब्ध है।

लालबत्ती व हूटर आसानी से उपलब्ध होने से नेता और उनके चेले इन्हें खरीदकर वाहन में रख लेते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार इनका दुरुपयोग करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं ने तो लालबत्ती का उपयोग कम कर दिया है, लेकिन छुटभैया नेताओं को आज लालबत्ती व हूटर के वाहनों में देखा जा सकता है।
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मसलन, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी तो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व हरियाणा में कांग्रेस तथा पंजाब में शिरोमणि अकाली दल व भाजपा के नेता अपने गांवों या कालोनी के निकट पहुंचते ही अपने वाहनों में पार्टी झंडा लगाने के साथ ही लालबत्ती व हूटर लगा देते हैं।

अपना रुतबा दिखाने के लिए व हूटर को इतने जोर से बजाते हैं कि इससे आम आदमी परेशान हो जाता है। पुलिस भी उन्हें कुछ कहने से डरती है। देशभर की तरह जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश में ज्यादातर सांसदों, मंत्रियों, विधायकों व दर्जाधारियों को गनर दिए गए हैं।

कई जगह तो जिन नेताओं को सरकार ने गनर नहीं दिए हैं, वे प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड लेकर भी चलते हैं। हूटर का सबसे ज्यादा आतंक बिहार में माना जाता है। वहां नेताओं में लालबत्ती के साथ हूटर लगाने की होड़ सी रहती है।


उत्तर प्रदेश में भी जो भी दल सत्ता में आता है, उसके बूथ स्तर का नेता भी हूटर लगा कर चलता है। उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में तो नेताओं के हूटर ध्वनि प्रदूषण को बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं।

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