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यूपी का एक ऐसा गांव जहां जुगाड़ लगाने पर भी नहीं होती शादी!

Mon, 12 Oct 2015 01:26 PM IST
अजय शर्मा/बीबीसी संवाददाता
अजय शर्मा/बीबीसी संवाददाता Updated Mon, 12 Oct 2015 01:26 PM IST
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village of banda in uttar pradesh, where no electricity

अगर आपको 1957 की 'मदर इंडिया' का गाँव देखना है, तो बांदा के गाँव माखनपुर चलें। माखनपुर जैसे गाँव 2015 में भी हो सकते हैं और ये कोई हैरानी की बात नहीं है।मगर लालटेन की रोशनी में जी रहे माखनपुर में सिर्फ घुप अंधेरा ही नहीं पसरा रहता।

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बिजली के अभाव ने इस गाँव का सामाजिक तानाबाना भी बदल डाला है।जब मैं उत्तर प्रदेश के इस गाँव में रात 11 बजे पहुँचा, तो समूचे गाँव में अंधेरा था। तारों की रोशनी ने हमें गाँव तक पहुँचने का वो रास्ता दिखाया जिस पर आप शायद दिन में भी चलना पसंद न करें।
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कालिंजर को जाने वाले रास्ते पर गाँव में घुसने का वही एकमात्र रास्ता है। करीब दो-तीन फीट गहरे गड्ढों से बनी, धूल की मोटी पर्त से अंटी एक कच्ची पगडंडी। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव के नेतृत्व में चल रही संवेदना यात्रा की टोली के साथ हम इस गाँव में पहुँचे।गाँव के जिस घर में रात को हम रुके, वहां की बहू नीलम यादव ने हमें हकीकत से रूबरू कराया।

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बहुतों के पास नहीं है मोबाइल

village of banda in uttar pradesh, where no electricity

नीलम खुद बीए और बीएससी पास हैं और अपने आसपास के माहौल को लेकर काफी जागरूक हैं।बांदा शहर की रहने वाली नीलम शादी के बाद पांच साल लगातार गाँव में रहीं, मगर अब बच्चों के भविष्य की खातिर शहर में रहती हैं। वो बताती हैं, ''हमें लगा कि हमारे बच्चे भी इसी हाल में पलेंगे तो हमें अच्छा नहीं लगा।

तो हम चले गए। 2005 में हमारी ननद बीमार हुईं, तो इतनी बुरी हालत हुई कि खटिया बनाई गई और नदी पारकर उन्हें ले जाना पडा। हम अपने माता-पिता से कहते थे कि आपने मुझे कहां डाल दिया।''

उनका दर्द उनकी आंखों की कोर से टपकने को बेताब आंसुओं में छिपा था। ढाई हजार की आबादी वाले, 900 वोटरों के गाँव माखनपुर में आज भी रात को घरों में लालटेन की रोशनी में लोग खाना खाते हैं।

यहां शादी कौन करेगा?

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बहुतों के पास मोबाइल फोन नहीं। जिनके पास हैं वो उन्हें चार्ज कराने गाँव के बाहर एक दुकान पर जाते हैं।गाँव में बिजली नहीं तो पीने का पानी भी नहीं और न कोई स्वास्थ्य केंद्र।रही-सही कसर सूखे ने पूरी कर दी है। कई कुएँ सूख चुके हैं। हैंडपंपों का पानी 100 फीट से नीचे है।

मुसीबतों के इस गाँव में बिजली के अभाव ने अगर सबसे ज्यादा कहर ढाया है तो वो हैं कुँवारे। नीलम की जुबानी ही सुनिए- ''जब मैं यहां शादी होकर आई तो यहां विश्वकर्मा बिरादरी की महिलाएं कहा करती थीं कि आपके यहां कोई लडकी हो तो हमारे लडकों के लिए बताएं। हम सोचते थे कि यहां कौन शादी करेगा, ये तो हम ही फँस गए हैं।

कभी कभी यहां लोग खरीदकर लडकी ले आते हैं। पिछले दिनों एक ऐसी लडकी भाग गई थी।''नीलम की बात सही थी। गाँव के एक बुजुर्ग के मुताबिक गाँव में करीब डेढ सौ कुँवारे लोग हैं, जिनमें से ज्यादातर 65 से 35 साल की उम्र के हैं।बिजली न होने और पीने का पानी न होने से गाँव को कोई अपनी बेटी देने को तैयार नहीं।

जुगाड़ तो बुहत लगाए लेकिन शादी नहीं हुई

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हालांकि लडकियों की शादी तुरंत हो जाती है।शिवबदन के छोटे भाई की शादी हो चुकी है। जब मैंने 42 साल के शिवबदन से पूछा तो उनका कहना था, ''जुगाड तो बहुत लगाया कि शादी हो जाए पर हुई नहीं। बीच में रिश्तेदार शादी की बातचीत काट देते हैं।''शिवबदन के सिवाय कोई ये मानने को तैयार नहीं कि उन्हें लडकी नहीं मिली।

बाकी लोग कहते हैं कि उन्होंने खुद ही शादी नहीं की है।45 साल के मलखान सिंह कहते हैं, ''शादी हमने नहीं कराई। न कोई साधन है आने-जाने का, न लाइट है। कोई व्यवस्था है नहीं। माता पिता ने शादी की कोशिश तो बहुत की, बात भी चलाई मगर हमने मना कर दिया।''

मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले 60 साल के नाना भाऊ महाराष्ट्र ने बताया कि उन्हें काम नहीं मिला तो उनकी शादी भी नहीं हो सकी।राम मिलन (40) के मुताबिक उनकी शादी इसलिए नहीं हुई क्योंकि ''गाँव में खाने-पीने की तकलीफ है। झुरहा (सूखा) पडता है।''गरीबी से जूझ रहे रमाशंकर (40) विकलांग हैं।

दूसरे की बेटी कैसे फंसा दे?

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कहते हैं कि उन जैसे गरीब को कौन बेटी देगा। जब मैंने पूछा कि आप शादी करना चाहते हैं तो मुस्कराने लगे।70 साल के बद्री के कुँवारे होने के पीछे भी बिजली वजह बनी।अब वो अपनी बाकी जिंदगी को ऐसे ही गाँव में गुजार देना चाहते हैं।

उनका कहना है कि जब मेरे अपने पेट का पूरा नहीं पडता तो कैसे दूसरे की बेटी को 'फंसा' दें।क्या बिजली किसी समाज के ढांचे में मूलभूत बदलाव ला सकती है?

1957 के भारत में ऐसा न हुआ हो पर 2015 में ये हो रहा है।और ये वो देश है जिसमें पूरे एशिया में पहली बार बिजली की चमक दिखाई दी थी और जो आजाद होकर 68 साल का हो चुका है।

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