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आडवाणी अब भी हैं पीएम पद की दौड़ में

Sat, 06 Apr 2013 09:57 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 06 Apr 2013 09:57 PM IST
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vijay goel bats for advani as pm

भाजपा में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पिछड़ रहे बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी की दावेदारी एक बार फिर उभर आई है।

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पार्टी के 33वें स्थापना दिवस समारोह में दिल्ली इकाई के अध्यक्ष विजय गोयल ने शीर्ष भाजपा नेतृत्व की उपस्थिति में 2014 का चुनाव आडवाणी के ‘नेतृत्व में’ जीतने की बात कर हलचल पैदा कर दी।
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यू-टर्न
इस मामले में भाजपा अभी तक शांत दिख रही थी। हालांकि बाद में पार्टी के अंदरूनी घमासान को भांपते हुए गोयल ने अपने कथन से यू-टर्न लेने की कोशिश की।

उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मेरा मतलब था कि हम अगली सरकार आडवाणीजी के ‘मार्गदर्शन’ में बनाएंगे।’

वैसे आडवाणी ने उसी मंच से गोयल के भाषण के बाद बोलते हुए अपनी दावेदारी का खंडन नहीं किया और साफ कहा कि वह सक्रिय राजनीति में बतौर ‘समर्पित कार्यकर्ता’ काम करते रहेंगे।
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डाला मुश्किल में
आडवाणी की इस बात को राजनीतिक हलकों में ‘पीएम-इन-वेटिंग’ की दौड़ में बने रहने का संदेश माना जा रहा है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित समारोह में गोयल ने यह कह कर पार्टी नेताओं को मुश्किल में डाल दिया कि ‘वर्तमान परिस्थितियों में हमें अटलजी की कमी शिद्दत से महसूस होती है।

मगर हम 2014 में आडवाणीजी के नेतृत्व में चुनाव जीत कर सरकार बनाएंगे।’ हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि सभी को पता है कि पार्टी में प्रधानमंत्री पद की उम्मीवारी का फैसला संसदीय बोर्ड करेगा। उन्होंने तो बस आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता को सम्मान देने के लिए ऐसा कहा।

अभी नहीं हुआ अंतिम निर्णय
गौरतलब है कि गुजरात में जीत की हैट्रिक के बाद पार्टी लगातार मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का संकेत दे रही है। हाल में पार्टी की राष्ट्रीय टीम में मोदी की छह साल बाद संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति में वापसी हुई है और उनके समर्थकों को महत्वपूर्ण पद मिला है।

पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय चुनाव अभियान समिति का भी दायित्व सौंपने का संकेत दिया है। ऐसे में गोयल की टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि पार्टी में भले ही मोदी के मंत्र का जाप हो रहा हो लेकिन प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

वैसे भी पार्टी और संघ का एक महत्वपूर्ण धड़ा मोदी पर दांव लगाने का विरोध करता रहा है। यह धड़ा मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने पर राजग में टूट के साथ-साथ चुनाव के बाद जरूरी पड़ने पर अन्य दलों का साथ न मिलने का तर्क दे रहा है।


मोदी और आडवाणी टकराव
भाजपा नेता गुपचुप स्वीकार करते हैं कि मोदी और आडवाणी के बीच अनेक मुद्दों पर वैचारिक मतभेद हैं और लंबे समय से पीएम पद की दावेदारी को लेकर प्रतिद्वंद्विता भी है।

कई मौकों पर देखने में आया है कि भाजपा के जिन कार्यक्रमों में दोनों को होना चाहिए, वहां एक की मौजूदगी में दूसरा अनुपस्थित रहा। लेकिन दोनों के बीच सीधा टकराव कभी सामने नहीं आया।

'राम मंदिर मुद्दे पर अपराध बोध नहीं, गर्व'
लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी का आह्वान किया है कि राम मंदिर आंदोलन पर अपराधबोध से ग्रस्त होने के बदले गर्व का प्रदर्शन करें।

अपने भाषण की शुरुआत आडवाणी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए पार्टी के आंदोलन से की। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं सांस्कृतिक आंदोलन था।

इसी मुद्दे ने पार्टी को नई ऊंचाईयां दी। मुझे यह स्वीकार करने में गर्व होता है कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया।

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