उपराष्ट्रपति ने फिर जताई देश में असहिष्णुता पर चिंता
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असहिष्णुता पर चल रही लगातार बहस में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि विविधता और असहमति के खिलाफ असहिष्णुता की प्रवृत्ति चिंताजनक है।
अंसारी ने ये बाते पुणे इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही जहां वे सोशल इनोवेशन एंड सोशल हार्मनी विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समानता पर आम सहमति होनी चाहिए।
संविधान में है प्रावधान
अंसारी ने कहा कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा,
समूह के अधिकारों के साथ-साथ व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने के
लिए प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि समानता, सशक्तीकरण और न्याय एक
लोकतांत्रिक समाज की
बुनियाद हैं। अंसारी ने कहा कि इस विविधता से भरे समाज में, अनेकानेक पहचना
वाले लोगों के प्रति हमें संवेदनशील होना होगा, अन्यथा यह बहुसंख्यकवादी
लोकतंत्र हो जाएगा।