तिरंगे को सलामीः गलती मोदी ने की या अंसारी ने?
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उपराष्ट्रपति कार्यालय ने गणतंत्र दिवस के दिन हामिद अंसारी द्वारा तिरंगे को सलामी न दिए जाने के मसले पर उठे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया है। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने प्रोटोकाल का हवाला देते हुए कहा है कि यदि राष्ट्रगान गाया जा रहा हो तो तिरंगे को सलामी उपराष्ट्रपति उसी स्थिति में दे सकता है, जब वह मुख्य पदाधिकारी हो।
उपराष्ट्रपति कार्यालय में ऑफिसर ऑफ स्पेशल ड्यूटी गुरदीप सिंह सप्पल ने ट्विटर पर कहा कि गणतंत्र दिवस पर मुख्य पदाधिकारी राष्ट्रपति थे, न कि उपराष्ट्रपति। इसलिए प्रोटोकाल के मुताबिक तिरंगे को सलामी राष्ट्रपति ही दे सकते हैं।
सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह के बाद सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर परिकर तिरंगे को सलामी दे रहे थे, जबकि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी सावधान की मुद्रा में खड़े थे। तस्वीर में बराक ओबामा भी थे।
सोशल मीडिया में सवाल उठा कि हामिद अंसारी मुसलमान हैं, इसलिए उन्होंने तिरंगे को सलामी नहीं दी। तस्वीर गणतंत्र दिवस समारोह में झंडोत्तलन के तुरंत बाद की थी।
और क्या कहता है प्रोटोकाल
झंडोत्तोलन के तुरंत बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। गुरदीप ने ट्विटर पर कहा, 'जब राष्ट्रगान गाया जा रहा हो, केवल मुख्य पदाधिकारी और वर्दी पहने व्यक्ति ही सलामी ले सकते हैं। जो सामान्य कपड़ों में होते हैं, वे सावधान की मुद्रा में खड़े होते हैं।'
उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति ही मुख्य पदाधिकारी होते हैं, क्योंकि वही तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर हैं। प्रोटोकाल के मुताबिक, वही सलामी लेंगे और उपराष्ट्रपति सावधान की मुद्रा में खड़े होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति मुख्य पदाधिकारी हों तो वह राष्ट्रगान के वक्त वह सिर पर एक टोपी पहनकर सलामी ले सकते हैं। भारत में तिरंगे को लेकर बने नियमों के मुताबिक, जब राष्ट्रगान गाया जा रहा हो उस समय जो सामान्य कपड़ों में होते हैं उन्हें झंडे की ओर देखते हुए सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होता है।
प्रोटोकाल की मानें तो सोमवार को गलती प्रधनमंत्री मोदी ओर रक्षामंत्री परिकर ने की थी न कि हामिद अंसारी ने। सोशल मीडिया में सोमवार को 2003 के गणतंत्र दिवस समारोह की एक तस्वीर भी शेयर की गई, जिसमें उस समय के राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सलामी ले रहे थे, जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सावधान की मुद्रा में खड़े थे।
(साभार: दोनों तस्वीरें सोशल मीडिया से ली गई हैं।)