संगीत की सतरंगी दुनिया से भी ताल्लुक रखते थे अशोक सिंघल
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उत्तर प्रदेश के आगरा में 15 सितंबर 1926 को जन्मे अशोक सिंघल के बारे में यह कौन जानता था कि वे हिन्दू संगठन विश्व हिन्दू परिषद के 20 साल तक लगातार अध्यक्ष रहेंगे।
सिंघल के पिता सरकारी अधिकारी थे। सिंघल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आईआईटी से इंजीनियरिंग में स्नातक थे । स्नातक के बाद सिंघल 1942 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बने और फिर उन्हें उत्तर प्रदेश और हरियाणा के प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी गई।
1975 से 1977 तक देश में जब आपातकाल का दौर था और इसी समय आरएसएस पर भी बैन लगाया गया था, उस दौरान सिंघल तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ चले आंदोलनों में शामिल रहे और इसी के बाद उन्हें दिल्ली का प्रांत प्रचारक बनाया गया था।
और फिर वीएचपी के ही होकर रह गए
1980 में सिंघल विश्व हिन्दू परिषद(वीएचपी) से जुड़े और फिर उसी के हो कर रह गए। 1984 में उन्हें वीएचपी का महासचिव बनाया गया और फिर सिंघल को संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया जिस पद पर वो 2011 तक बने रहे।
सिंघल केवल राजनीति और धर्म ही नहीं वरन् संगीत की सतरंगी दुनिया से भी ताल्लुक रखते थे। उन्होंने पंडित ओंकार नाथ ठाकुर की छत्रछाया में शास्त्रीय संगीत भी सीखा था।
200 मंदिरों का कराया निर्माण
इस घटना के बाद वीएचपी ने 200 मंदिरों का निर्माण कराया जो खास तौर से दलितों के लिए था। इसी दौरान सिंघल वीएचपी में संयुक्त सचिव के पद पर आए थे। इन मंदिरों के निर्माण के बाद उनका दावा था कि इसके बाद धर्मांतरण बंद हो गया।
सन् 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित वीएचपी की पहली धर्म संसद को आयोजित करने का सारा श्रेय सिंघल को ही दिया जाता है। इसी धर्म संसद के बाद सिंघल रामजन्म भूमि मामले के कर्ताधर्ता हो गए।
विवादित बयानों से था नाता
सिंघल अमूमन अपने विवादित बयानों के लिए भी जाने जाते थे। हिन्दुओं को ज्यादा बच्चा पैदा करना चाहिए। बीते साल नवंबर में ही उन्होंने कहा था कि दिल्ली में 800 साल बाद हिन्दुओं की सरकार आई है।
2013 में विहिप ने अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा करने का प्रयास किया था, यूपी सरकार उस आयोजन के विरोध में थी। सिंघल को अयोध्या जाने से पहले लखनऊ एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया था।