यूपी में मुस्लिम संगठनों के विरोध को विहिप ने लिया आड़े हाथ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदू संगठनों ने भी पैगंबर मोहम्मद पर कथित हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के बयान की निंदा करते हुए उन्हें कड़ा दंड देने की वकालत की है। मगर उनके बयान के खिलाफ मुस्लिमों के उग्र प्रदर्शन और ईनाम राशि के फतवे को भी उन्होंने गलत करार दिया है। कमलेश के बयान और उसके बाद के हालात दोनों को ही गलत करार देते हुए हिंदू संगठनों ने मुस्लिम धर्मगुरूओं और बुद्धिजीवियों से आह्वान किया है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें। इससे किसी भी धर्म का भला नहीं होगा। बल्कि देश की धार्मिक सदभाव को चोट पहुंचेगी।
मुस्लिमों के उग्र प्रदर्शन को विहिप ने असहनशीलता करार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यदि मुस्लिमों की तरह हिंदूओं ने भी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी तो क्या होगा यह समझ से परे हैं। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा है कि यह प्रदर्शन मुस्लिमों के मानसिकता को दर्शाता है। उनके उग्र मानसिकता का ही परिणाम है कि पूरे देश-दुनिया में उनके खिलाफ लहर बह रही है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू धर्म और उसके देवी देवताओं के खिलाफ कोई बयानबाजी होती है तो ये मुस्लिम संगठन कहां रहते हैं। लेकिन जब उनके पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी हुई है तो वे देशभर में उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने सेक्युलर राजनीति की वकालत करने वाले सियासी दलों पर भी प्रहार किया है। विहिप नेता ने कहा कि ओवैसी सरीखे लोग जब भगवान राम, सीता और तमाम देवी देवताओं पर गलत टिप्पणी करते हैं तो कोई भी उसकी निंदा नहीं करता है।
ओवैसी, कमलेश और अमिर खान के खिलाफ निंदा कानून हो पारित
कमलेश के बयान पर उन्होंने कहा कि उसपर कानून अपना काम करेगा। मुस्लिम संगठनों को जो भी करना है वह कमलेश के साथ करें। उग्र प्रदर्शन के जरिए बेकसूर जनता और संपत्ति का नुकसान क्यों।
वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी महाराज ने भी मुस्लिम संगठनों के उग्र प्रदर्शन पर विरोध जताया है। हालांकि कमलेश के बयान की निंदा करते हुए उन्होंने कहा है कि धार्मिक भावना को आहत करने वाले ओवैसी, कमलेश और अमिर खान सरीखे लोगों के खिलाफ निंदा कानून पारित होना चाहिए।
उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरूओं और बुद्धिजिवियों से उग्र प्रदर्शन और फतवे जारी करने वाले कदमों से बचने का आह्वान किया है। चक्रपाणी का कहना है कि मुस्लिम संगठन कानून को अपने हाथ में न लें बल्कि कमलेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडें। कमलेश के बयान की घोर निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके गलत आचरण के खिलाफ ही उन्होंने 2008 में उन्हें दल से बाहर कर दिया था।
कमलेश को कठोर दंड की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों पर रोक के लिए कानून बनना चाहिए। मुस्लिमों के उग्र विरोध और देश के हालातों पर उन्होंने कहा कि इससे किसी भी धर्म को लाभ नहीं होने वाला, यह महज सियासी दलों का पैंतरा है।