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'अतिक्रमण वाले घर में नहीं रह सकती सरपंच'

Sat, 09 Jan 2016 11:53 PM IST
Updated Sat, 09 Jan 2016 11:53 PM IST
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verdict of supreme court

अतिक्रमण किए घर में रह रही महाराष्ट्र की एक महिला सरपंच को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने जायज ठहराया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जन प्रतिनिधियों केइस तरह का आचरण स्वीकार योग्य नहीं है। इससे पहले बांबे हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

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न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरपंच पर्वताबाई की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट केफैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं बनता। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के प्रावधान केतहत पर्वताबाई की ग्राम पंचायत में सदस्यता खत्म कर दी गई थी।
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शीर्ष अदालत ने इस निर्णय को सही ठहराते हुए महिला सरपंच को किसी तरह की राहत देने से इनकार किया है। पीठ ने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अतिक्रमण किए घर में रहेगा तो दूसरे लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
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ये था मामला

verdict of supreme court

मामले के अनुसार पर्वताबाई वर्ष 2012 में नागपुर जिले के दूधाला से सरपंच का चुनाव जीती थी। सरपंच बनने के बाद उसी गांव के एक निवासी ने शिकायत की थी कि सरपंच पर्वताबाई जिस घर में रहती है उसमें अतिक्रमण किया हुआ है। चूंकि ऐसा करना ग्राम पंचायत अधिनियम के खिलाफ था, लिहाजा ग्राम पंचायत से उसकी सदस्यता खत्म कर दी गई।

47 वर्ष पर्वताबाई अपने पति से अलग होकर अपने पिता के घर पर रहती थी और यह घर अतिक्रमण की हुई जमीन पर बनी हुई थी। पर्वताबाई की उस दलील को अदालत से मानने स इनकार कर दिया कि पति से अलग होने केबाद उसकेपास अपने पिता के घर में रहने केअलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

उसका कहना था कि वह उसका घर नहीं बल्कि उसकेपिता का है लिहाजा उसकी सदस्यता को खत्म करना गलत है। लेकिन अदालत ने उसकी तमाम दलीलों को खारिज कर दिया।

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