जेटली पर आरोप लगाना सूरज पर थूकने जैसाः वेंकैया
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डीडीसीए मुद्दे पर जेटली की मांग पर अड़े विपक्ष के कारण लोकसभा की कार्यवाही लगातार तीसरे दिन भी बाधित रही, जिसमें रत्तीभर भी सुधार न होता देख अध्यक्ष ने अनिश्चितकाल तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। स्पीकर के इस निर्देश के साथ ही लोकसभा के इस सत्र का भी पटाक्षेप हो गया।
वहीं राज्यसभा में भी अयोध्या मामले को लेकर जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी। इसके साथ ही एनडीए सरकार के बहुप्रतिक्षित जीएसटी बिल सहित कई महत्वपूर्ण बिल भी राज्यसभा में अटके रह गए।
मोदी सरकार इसी सत्र में जीएसटी बिल को राज्यसभा में पास करवाने लिए एडी चोटी का जोर लगाए हुए थी लेकिन नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के अड़ने के बाद उसका सारा खेल बिगड़ गया। रही सही कसर डीडीसीए मुद्दे ने पूरी कर दी। अब ये बिल बजट सत्र में राज्यसभा में पास होने के लिए रखे जा सकते हैं।
वेंकैया बोले- पीएम और सरकार को धमका रही कांग्रेस
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने विपक्ष के अडियल रवैये पर निशाना साधते हुए कहा कि शीत सत्र में जिस तरह से संसद में व्यवहार किया गया उससे देश की भावनाओं को धक्का पहुंचा है। विपक्ष में बैठे हमारे साथी जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान नहीं करना चाहते।
वे लगताार हमारे लिए बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। कांग्रेस को इस बात के लिए देश को जवाब देना होगा कि क्यों उसने राज्सभा की कार्यवाही नहीं चलने दी।
लोकसभा ने शीत सत्र में 14 बिल पास किए लेकिन राज्सभा में मात्र 9 को ही रजामंदी मिल सकी। नायडू ने आरोप लगाया कि अपने इस रवैये से कांग्रेस प्रधानमंत्री और सरकार को भयभीत करना चाहती है।
वेंकैया ने दावा किया जबसे हमारी सरकार बनी है हमने कोई गलत काम नहीं किया, कोई गलती नहीं की, कोई पाप नहीं किया। कोई उंगली नहीं उठा सकता हमारे ऊपर। डीडीसीए मुद्दे पर जेटली का समर्थन करते हुए कहा कि उन पर आरोप लगाना सूरज पर थूकने जैसा है। उन पर थूका खुद पर ही गिरेगा।
वहीं वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने उम्मीद जताई कि सरकार बजट सत्र में जीएसटी बिल को पास कराकर 1 अप्रैल से इसे लागू कराने का प्रयास करेगी।
जेटली और अयोध्या मुद्दे पर शुरू हुआ हंगामा
इससे पूर्व बुधवार को लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने डीडीसीए मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस के सदस्य वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते रहे।
कांग्रेस सदस्यों की आपत्ति स्पीकर सुमित्रा महाजन के उस बयान को लेकर भी थी जिसमें उन्होंने विपक्षी सांसदों के हंगामे को राष्ट्रहित की बजाय निहित स्वार्थ से जोड़ते हुए निशाना साधा था। कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा उनकी पार्टी को निहित स्वार्थ वाले बयान से दुख पहुंचा है इसलिए इसे लोकसभा की कार्यवाही से निकाला जाए।
इस पर स्पीकर ने अपनी टिप्पणी से निहित स्वार्थ वाली बात को निकालने की मंजूरी दे दी हालांकि राष्ट्रहित शब्द कार्यवाही में बना रहेगा। वहीं खड़गे की इस बात पर संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने आपत्ति जताई।
इसके चलते पक्ष विपक्ष में लगातार विवाद के हालात बने रहे। नतीजतन अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। दूसरी ओर राज्यसभा में भी ऐसे ही हालात बने रहे। जेडीयू के केसी त्यागी ने अयोध्या में शिला पूजन का मुद्दा उठाया। केसी त्यागी ने इस पर चर्चा के लिए नोटिस दिया।
मायावती ने केन्द्र और सपा सरकार पर साधा निशाना
उन्हें बोलने के लिए तीन मिनट का समय दिया, खत्म होने पर भी त्यागी ज्यादा समय की मांग करने लगे। सभापति ने मना किया तो त्यागी के समर्थन में कांग्रेस और जेडीयू के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। सरकार की ओर से मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा मामला कोर्ट में है इसलिए इस पर बहस करना जायज नहीं है।
उन्होंने दलील दी कि पत्थर तराशी का काम सालों से चल रहा है अब इसे बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं इस मुद्दे पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र के साथ साथ उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को भी लपेटे में ले लिया।
मायावती ने कहा मैं जब तक मुख्यमंत्री थी मैंने वहां कोई गलत काम नहीं करने दिया। जब मामला कोर्ट में है तो ये प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वहां कोई गलत काम नहीं होने दिया जाए। इस मुद्दे पर लगातर बन रहे गतिरोध के बाद सभापति ने कार्यवाही स्थगित कर दी।
संसद की कार्यवाही लगातार बाधित रहने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने दोष सरकार पर ही मढ़ दिया। कहा कि वो लोग इसका दोष हम पर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें ही नहीं पता संसद कैसे चलाई जाती है।