मोटर चालक खुद को समझते हैं सड़क का बादशाह: सुप्रीम कोर्ट
बेपरवाह और लापरवाह वाहन चालकों पर बरसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे यह न समझे कि सड़क उनके लिए ही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़क जितना वाहन चालकों के लिए है उतना ही पैदलयात्रियों की भी है। अदालत ने कहा कि हमें विकसित देशों से सीखने की जरूरत है जहांपैदलयात्रियों की कितनी तरजीह दी जाती है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मोटर चालकों को यह भ्रम कतई नहीं होना चाहिए कि सड़कें सिर्फ उनके प्रयोग के लिए हैं और वे सड़क पर अपनी मनामौजी करें। खुद को सड़क का बादशाह समझने की भूल नहीं करनी चाहिए मोटर चालकों को। कार या भारी वाहन मालिक होने का यह कतई मतलब नहीं है कि जिस तरह से उनका दिल चाहे उस तरह से वे वाहन चलाएं।
पीठ ने कहा कि मोटर चालक पैदलयात्रियों को दोयम दर्जा का नागरिक समझते हैं। पैदलयात्रियों की परवाह किए बगैर वाहनों को सड़क पर दौड़ना सही नहीं है। पीठ ने कहा कि भारी वाहन चालकों को सावधानी पूर्वक वाहन चलना चाहिए।
पैदलयात्रियों को दें तरजीह
देश में पैदलयात्रियों को इज्जत न मिलने से आहत न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा कि यहां के वाहन चालकों को विकसित देशों से कुछ सिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशों में वाहन चालक पैदलयात्रियों को बहुत तरजीह देते हैं। वाहन चालक पैदलयात्रियों को रास्ता देते हैं।
अदालत ने एक लापरवाह ट्रैक्टर चालक की सजा को सही ठहराते हुए ये टिप्पणी की है। ट्रैक्टर चालक ने आठ वर्षीय बच्चे को कुचल दिया था। यह मामला हरियाणा केसोनीपत का है। हालांकि अदालत ने दोषी चालक की सजा एक साल से घटाकर आठ महीने कर दी लेकिन जुर्माने की रकम बढ़ाकर एक लाख कर दी है। जुर्माने की रकम पीड़ित परिवार को दी जाएगी।