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वीरभद्र ने ब्लैकमनी को व्हाइट किया: जेटली
शिमला/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Oct 2012 10:52 PM IST
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वरिष्ठ भाजपा नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर कड़े प्रहार किए और कहा कि स्टील कंपनी की डायरी में ‘वीबीएस’ अंकित होने पर वह शक के दायरे में थे, लेकिन तीन साल के संशोधित आयकर रिटर्न में कृषि आय में छह करोड़ से ज्यादा बढ़ोतरी दिखाकर वह दस्तावेजों में फंस गए हैं।
उन्होंने ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का प्रयास किया है। उन पर धोखाधड़ी का मामला बनता है। उन्होंने वीरभद्र के खिलाफ स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। जेटली ने मंगलवार को यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि ‘वीबीएस’ मामले का विस्तार मुंबई से शिमला तक है। मुंबई में स्टील कंपनी की डायरी में ‘वीबीएस’ अंकित मिलता है और एलआईसी एजेंट आनंद चौहान पंजाब नेशनल बैंक की शिमला शाखा में वर्ष 2008-09 से लेकर आगे के तीन सालों तक लगभग पांच करोड़ रुपये जमा कराते हैं।
आनंद चौहान ने इसी बैंक एकाउंट से फिर चेक इश्यू कर वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके दोनों बच्चों की एलआईसी पालिसी के एक साथ प्रीमियम चुकता किए गए। उन्होंने सवाल दागा कि आनंद चौहान ने क्यों वीरभद्र सिंह की तरफ से प्रीमियम जमा किया? कैसे एक साधारण एजेंट बैंक खाते में जमा करने के लिए करोड़ों रुपये की राशि प्राप्त कर लेता है। भाजपा नेता ने कहा कि इस ब्लैक मनी को व्हाइट में बदलने के लिए दो मार्च 12 को वीरभद्र सिंह की ओर से रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया गया।
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वीरभद्र ने वित्तीय वर्ष 2008, 2009 और 2010 के आयकर रिटर्न में बागीचे से आय क्रमश: 11 लाख 5 हजार, 15 लाख और 25 लाख बताई। 17 जून 2008 को वीरभद्र और बागीचे के ठेकेदार बिशंभर दास के बीच जो एग्रीमेंट हुआ, उसके हिसाब से उन्हें तीन वर्षों के लिए हर साल 10 लाख 50 हजार रुपये मिलने थे। लेकिन वीरभद्र और आनंद चौहान ने बैक डेट में 15 जून 2008 का एक एग्रीमेंट किया क्योंकि एलआईसी एजेंट आनंद चौहान को वीरभद्र का बागीचा मैनेज करना था।
कहा, फर्जी है एग्रीमेंट
जेटली का दावा है यह एग्रीमेंट फर्जी है, क्योंकि ठेकेदार बिशंभर दास के साथ पहले से ही एग्रीमेंट बना हुआ था। इसमें बगीचे की 98 फीसदी आमदनी वीरभद्र सिंह और दो फीसदी चौहान को मिलनी थी। इसके बाद वीरभद्र ने रिवाइज्ड आय कर रिटर्न दायर किया। इसी बगीचे से उनकी कृषि आय क्रमश: 2.21 करोड़, 2.80 करोड़ और 1.55 करोड़ हो गई। इस तरह उनकी आय 6 करोड़ से ज्यादा बढ़ गई है। यह रकम कैसे बढ़ी? इसी पर सवाल है।
गडकरी ने जांच को कहा
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की कंपनी को लेकर लगे ताजा आरोपों पर अरुण जेटली ने कहा कि इन आरोपों के पीछे तथ्य नहीं हैं। स्वयं नितिन गडकरी यह बात सामने आने के बाद सबसे पहले खुद कह चुके हैं कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। अब जांच तो केंद्र सरकार को करवानी है।
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उन्होंने ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का प्रयास किया है। उन पर धोखाधड़ी का मामला बनता है। उन्होंने वीरभद्र के खिलाफ स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। जेटली ने मंगलवार को यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि ‘वीबीएस’ मामले का विस्तार मुंबई से शिमला तक है। मुंबई में स्टील कंपनी की डायरी में ‘वीबीएस’ अंकित मिलता है और एलआईसी एजेंट आनंद चौहान पंजाब नेशनल बैंक की शिमला शाखा में वर्ष 2008-09 से लेकर आगे के तीन सालों तक लगभग पांच करोड़ रुपये जमा कराते हैं।
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आनंद चौहान ने इसी बैंक एकाउंट से फिर चेक इश्यू कर वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके दोनों बच्चों की एलआईसी पालिसी के एक साथ प्रीमियम चुकता किए गए। उन्होंने सवाल दागा कि आनंद चौहान ने क्यों वीरभद्र सिंह की तरफ से प्रीमियम जमा किया? कैसे एक साधारण एजेंट बैंक खाते में जमा करने के लिए करोड़ों रुपये की राशि प्राप्त कर लेता है। भाजपा नेता ने कहा कि इस ब्लैक मनी को व्हाइट में बदलने के लिए दो मार्च 12 को वीरभद्र सिंह की ओर से रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया गया।
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वीरभद्र ने वित्तीय वर्ष 2008, 2009 और 2010 के आयकर रिटर्न में बागीचे से आय क्रमश: 11 लाख 5 हजार, 15 लाख और 25 लाख बताई। 17 जून 2008 को वीरभद्र और बागीचे के ठेकेदार बिशंभर दास के बीच जो एग्रीमेंट हुआ, उसके हिसाब से उन्हें तीन वर्षों के लिए हर साल 10 लाख 50 हजार रुपये मिलने थे। लेकिन वीरभद्र और आनंद चौहान ने बैक डेट में 15 जून 2008 का एक एग्रीमेंट किया क्योंकि एलआईसी एजेंट आनंद चौहान को वीरभद्र का बागीचा मैनेज करना था।
कहा, फर्जी है एग्रीमेंट
जेटली का दावा है यह एग्रीमेंट फर्जी है, क्योंकि ठेकेदार बिशंभर दास के साथ पहले से ही एग्रीमेंट बना हुआ था। इसमें बगीचे की 98 फीसदी आमदनी वीरभद्र सिंह और दो फीसदी चौहान को मिलनी थी। इसके बाद वीरभद्र ने रिवाइज्ड आय कर रिटर्न दायर किया। इसी बगीचे से उनकी कृषि आय क्रमश: 2.21 करोड़, 2.80 करोड़ और 1.55 करोड़ हो गई। इस तरह उनकी आय 6 करोड़ से ज्यादा बढ़ गई है। यह रकम कैसे बढ़ी? इसी पर सवाल है।
गडकरी ने जांच को कहा
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की कंपनी को लेकर लगे ताजा आरोपों पर अरुण जेटली ने कहा कि इन आरोपों के पीछे तथ्य नहीं हैं। स्वयं नितिन गडकरी यह बात सामने आने के बाद सबसे पहले खुद कह चुके हैं कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। अब जांच तो केंद्र सरकार को करवानी है।