वरुण की तारीफ पर राहुल गांधी खुश, भाजपा मुश्किल में
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राजनीति ऐसी चीज है, जिसमें रिश्ते-नातों की कहानी बार-बार बदलती रहती है। मौजूदा लोकसभा चुनावों में भी भाई के बहन के खिलाफ लड़ने, बीवी के मियां के खिलाफ उतरने और चाचा के भतीजे से लोहा लेने के उदाहरण मिल जाएंगे।
कोई टिकट न मिलने की वजह से दूसरे दल में भाग रहा है, तो कोई गलत सीट से मिला टिकट लौटाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। नए रिश्ते बन रहे हैं, पुराने रिश्ते बिगड़ रहे हैं।
लेकिन इस बीच देश के सबसे अहम गांधी परिवार में इन दिनों अजीबोगरीब घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी जहां सोनिया गांधी पर करारा हमला बोल रही हैं, वहीं वरुण गांधी ने अपने चचेरे भाई राहुल गांधी की तारीफ की है। हालांकि, यह आशंका भी जताई जा रही है कि वो ऐसा कर मुश्किल में फंस सकते हैं।
वरुण ने दिया राहुल गांधी का उदाहरण
वरुण गांधी मौजूदा चुनावों में पीलीभीत के बजाय सुल्तानपुर से मैदान में हैं और चुनाव प्रचार करते वक्त उनके मन में अचानक राहुल को लेकर मोहब्बत जाग गई लगती है।
सभी को चौंकाते हुए वरुण गांधी ने राहुल गांधी की तारीफ की है। हैरत इसलिए होनी स्वाभाविक है कि एक ही परिवार के ये दोनों हिस्से बीते कई वक्त से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन एक-दूसरे की तारीफ करते कभी नहीं दिखते।
एक नुक्कड़ सभा में वरुण गांधी जब मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्होंने बताया कि वो इस इलाके के लिए क्या-क्या करना चाहते हैं। और यह जानकारी देते वक्त उन्होंने राहुल का उदाहरण उठाया।
दिल खोलकर की चचेरे भाई की तारीफ
वरुण गांधी ने कहा, "मैं सुल्तानपुर में वैसा ही काम करना चाहता हूं, जैसा राहुल गांधी अमेठी में कर रहे हैं। मैं यहां उसी तरह लघु उद्योगों को बढ़ावा देना चाहता हूं, जैसे वहां दिया गया है।"
इसके अलावा अमेठी में स्वयंसेवी समूहों की तर्ज पर उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही करने की बात उठाई। हालांकि, वो यह कहना भी नहीं भूले कि राजनीति में विरोधी की तारीफ करना सही नहीं होता।
अमेठी में विकास से जुड़े कामकाज के लिए राहुल गांधी की तारीफ करने के बाद उन्होंने कहा, "हालांकि, इस तरह मुझे यहां पर राहुल गांधी की तारीफ नहीं करनी चाहिए।"
वरुण पर भारी पड़ सकती है राहुल की तारीफ
लेकिन वरुण गांधी की यह छोटी सी टिप्पणी भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। दरअसल, नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा, कांग्रेस को विकास के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में वरुण की तरफ से राहुल की यह तारीफ भाजपा पर भी भारी पड़ सकती है। क्योंकि मोदी बार-बार राहुल को शहजादा बताकर हमला करते रहे हैं।
वरुण के इस बयान के पीछे कुछ और मतलब भी निकाले जा रहे हैं। इस तारीफ से एक संभावना यह भी तैर गई कि क्या वरुण ने ऐसा कर भविष्य के लिए कोई संकेत देने की कोशिश की है। अगर ऐसा वाकई है, तो भाजपा के लिए यह दोहरी मुश्किल होगी।
मेनका गांधी के बेटे ने अपने बयान से पहली बार भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी नहीं की है। पिछले चुनावों में वो आपत्तिजनक बयान देकर फंस गए थे। भाजपा का मानना है कि अल्पसंख्यकों पर उनके दिए बयान ने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया।
राहुल गांधी ने भी दिया जवाब
इस बीच सोनिया गांधी और राहुल गांधी बुधवार को रायबरेली में थे, जहां कांग्रेस अध्यक्ष ने नामांकन दाखिल किया। सोनिया ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रायबरेली एक बार फिर उन्हें जीत देगी।
हमने रणनीति के तहत काम किया है। एजुकेशन हब का आधार तैयार किया है और किसानों को ध्यान में रखते हुए फूड पार्क बनाया है, इसलिए वरुण जो कह रहे हैं, सही कह रहे हैं।
राहुल ने कहा, "अमेठी के लोगों से मेरा गहरा रिश्ता है। यह वही तय करेंगे कि लोकसभा चुनावों में किसे जीतना चाहिए।" जाहिर है, कुमार विश्वास और स्मृति ईरानी की चुनौती का सामना कर रहे राहुल को वरुण की तारीफ ने नया बल दिया होगा।
मेनका कर चुकी हैं सोनिया गांधी पर हमला
इस पर कांग्रेस की बांछें भी खिल गई हैं। पार्टी के शीर्ष नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने अमेठी में काफी काम किया है और अगर कोई भी उनकी तारीफ करता है, तो इसका स्वागत है।
दरअसल, सोनिया और मेनका के बीच तल्खी होने के बावजूद वरुण गांधी पहले ही साफ कर चुके थे कि वो राहुल गांधी के खिलाफ प्रचार नहीं करेंगे और न ही अपशब्दों का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा था, "राजनीति में व्यक्तिगत हमलों की जगह नहीं होनी चाहिए।"
हालांकि, उनकी मां और पीलीभीत से चुनाव लड़ रहीं मेनका गांधी ने सोनिया पर करारा हमला बोला था। उन्होंने कहा था, "उनके पास करोड़ों रुपए हैं। दहेज में तो वो कुछ लाई नहीं थीं, ऐसे में पैसा कहां से आया?"