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वरुण ने भी उठाई फांसी की सजा के खिलाफ आवाज

Sun, 02 Aug 2015 08:01 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Sun, 02 Aug 2015 08:01 AM IST
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Varun also raised voice against death penalty

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को फांसी दिए जाने के बाद भारत में फांसी की सजा खत्म करने की आवाज तेज हो रही है। तमाम सामाजिक संगठनों के बाद अब भाजपा सांसद वरुण गांधी भी इस बहस में कूद पड़े हैं।

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उन्होंने फांसी की सजा का पुरजोर विरोध किया है। एक लेख में वरुण ने मौत की सजा पर कई सवाल उठाए हैं। उनके लेख में किसी एक शख्स की फांसी का जिक्र नहीं है, लेकिन उन्होंने फांसी की सजा को क्रूर बताया है।
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वरुण ने कहा है कि मौत की सजा पाने वालों में से 75 फीसदी सामाजिक और आर्थिक स्तर पर दरकिनार श्रेणी के लोग हैं। ऐसे मामलों में 94 फीसदी लोग दलित समुदाय या अल्पसंख्यक हैं। मौत की सजा गरीबी की वजह से कमजोर कानूनी लड़ाई का नतीजा है।

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दे सकते हैं कोई और सजा

Varun also raised voice against death penalty

वरुण ने फांसी की सजा को मानवाधिकार से जोड़ा है। उन्होंने कहा है कि सरकार को चाहिए कि वह इस सजा पर विचार करें। इसकी जगह किसी भी अपराधी को दूसरी सजा दी जा सकती है।

फांसी के बदले अगर किसी दोषी को पूरी जिंदगी जेल में रखा जाए तो लोग अपराध करने से डरते हैं। उनके मुताबिक, अनुसंधानकर्ता भी अपराधियों में डर और मौत की सजा के बीच कोई संबंध नहीं जोड़ पाए हैं।

नेशनल रिसर्च काउंसिल स्टडी 2012 के मुताबिक, 88 फीसदी अपराध विशेषज्ञ मानते हैं कि मौत की सजा से डर पैदा नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट ने तो 2014 में माना था कि मौत की सजा मिलने का इंतजार एक टॉर्चर की तरह होता है।

अमेरिका का दिया उदाहरण

Varun also raised voice against death penalty

उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि 2014 में देश की अदालतों ने 64 लोगों को मौत की सजा सुनाई। जिन 55 देशों में पिछले साल मौत की सजा सुनाई गई उनमें भारत पहले 10 देशों में शुमार रहा, जबकि 1983 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फांसी की सजा सिर्फ ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में ही दी जाए।

अमेरिका का उदाहरण देकर वरुण ने लिखा है कि मौत की सजा में सामाजिक-आर्थिक भेदभाव भी नजर आता है। उनका सुझाव है कि ऐसे मामलों में पैरोल भी न्यूनतम सजा काट लेने के बाद ही मिले।

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