चाह कर भी नहीं सौंपी जा सकी जापानी पीएम को काशी की चाबी
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे को प्रतीक के तौर पर काशी की चाबी चाह कर भी नहीं सौंपी जा सकी। लोहे से बनी चाबी जब लाई गई, तब ऐन वक्त पर विदेश मंत्रालय के अफसर हैरान रह गए।
महापौर ने वही चाबी जापानी पीएम को सौंपने की इच्छा जताई लेकिन विदेश मंत्रालय के अफसरों की राय थी कि लोहे की चाबी से इस शाही स्वागत पर पानी फिर जाएगा, ऐसे में चाबी धरी की धरी रह गई।
यह चाबी परंपरा के तौर पर काशी आने वाले राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में उन्हें भेंट की जाती है। इससे पहले यह चाबी प्रतीक के तौर पर ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ को भेंट की गई थी।
धरी रह गई चाबी
गंगा आरती के बाद शिंजो को काशी की चाबी महापौर राम गोपाल मोहले के हाथों सौंपे जाने की तैयारी पर शनिवार की रात विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के हस्तक्षेप पर पानी फिर गया। किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के आगमन पर महापौर के हाथों चाबी सौंपने की परंपरा रही है।
पता चला है कि गंगा आरती के बाद जब भेंट करने के लिए चाबी लाई गई, तब उसे देख अफसर मुश्किल में पड़ गए। विदेश सेवा के एक अधिकारी ने महापौर को सलाह दी कि वह लोहे से बनी चाबी कतई न सौंपें। इससे इस भव्यता वाले माहौल में शिंजो के स्वागत पर पानी फिर जाएगा। इस चाबी से जापानी अफसरों के बीच भी किरकिरी हो सकती है।
अफसरों का कहना था कि चाबी सौंपनी थी तो उसे सोने या चांदी में बनवाना चाहिए था। किसी ने कहा कि इसे डिब्बे में बंद कर दे दिया जाए, लेकिन फिर बात आई कि शिंजो को चाबी भेंट करते समय डिब्बा हर हाल में खोलना ही पड़ेगा। ऐसे में चाबी सौंपने की योजना रद्द कर दी गई।
''काशी की परंपरा के अनुसार जापान के पीएम शिंजो अबे को प्रतीक के तौर पर सौंपने के लिए चाबी बनवाई गई थी लेकिन वह लोहे की बन गई थी। लोहे की चाबी भेंट करना उचित नहीं समझा गया। विदेश मंत्रालय के एक अफसर ने भी इस चाबी को सौंपना उचित नहीं माना। इसलिए चाबी शिंजो को नहीं सौंपी जा सकी।''
-राम गोपाल मोहले, महापौर-वाराणसी