जानिए उस शख्स को जिसने किया बनारस में मोदी की नाक में दम!
बनारस में इन दिनों रस कम, तल्खी ज्यादा दिख रही है। सियासी जंग का केंद्र बिंदू बना यह शहर अजीबोगरीब किस्म के दिन देख रहा है। राजनीति चरम पर है और माहौल पूरी तरह से नेतागिरी का हो चुका है।
भाजपा ने गुरुवार को बनारस में खूब हल्ला काटा। दिन भर जिला प्रशासन और राज्य सरकार को कोसा और शाम में इजाजत न होने के बावजूद बड़ी चालाकी से नरेंद्र मोदी का रोड शो आयोजित कर दिया।
भाजपा नेता दिन भर बनारस के डीएम और निर्वाचन अधिकारी प्रांजल यादव के पीछे हाथ धोकर पड़े रहे। लेकिन प्रांजल के बारे में जरा जाना जाए, तो अहसास होता है कि सियासत के चक्कर में वो बिना किसी वजह के बलि के बकरे बनाए जा रहे हैं।
बनारस की सूरत बदलने का जिम्मा
नरेंद्र मोदी की बेनियाबेग रैली को रेड सिग्नल दिखाने से काफी पहले निर्वाचन अधिकारी प्रांजल यादव इस बात को लेकर मशहूर रहे कि उनके आगे फालतू की बातें नहीं चलती।
34 साल के प्रांजल यादव ने फरवरी 2013 में जिलाधिकारी का जिम्मा संभाला था और तब से वो ऐसे कई फैसले कर चुके हैं, जो कुछ अफसरों को भले पसंद न आए हों, लेकिन जनता उनसे बेहद खुश रही है।
उन्होंने कड़ा विरोध होने के बावजूद अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर दिखाई, प्रोजेक्ट में रफ्तार न लाने की वजह से जल संस्थान के एक अधिकारी को एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में पहुंचाया और तहसील दिवस पर कई अफसरों को डांट पिलाई, जिनका रवैया उन्हें ठीक नहीं लगा था।
चुनावों ने खड़ी की मुश्किल
गड्ढों में धंसी सड़कें, बेतरतीब ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़। बनारस की गलियों और सड़कों पर इन दिक्कतों को इस तरह स्वीकार कर लिया गया था, जैसे यह जिंदगी का अहम हिस्सा हों।
इंडियन एक्सप्रेस के मुलेकिन 2006 बैच के यूपी काडर अफसर प्रांजल यादव ने इन तमाम चीजों को दुरुस्त करने में जरा देर नहीं लगाई। उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ कदम उठाए, साथ ही बैरीकेड भी लगा दिए, ताकि साफ कराई गई सड़कों पर दोबारा ऐसा कब्जा न किया जा सके।
हालांकि, इन दिनों वो अपने सबसे मुश्किल इम्तहान का सामना कर रहे हैं। उनके सामने इन लोकसभा चुनावों की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बनारस में चुनाव सही तरह से संपन्न कराने की जिम्मेदारी है।
सभी राजनीतिक दलों ने लगाया आरोप
इन दिनों बनारस में सियासी पारा गर्म है और भाजपा के आरोपों ने प्रांजल यादव ने कहा, "चुनाव ठीक तरह से संपन्न कराने में काफी मेहनत लगती है। लेकिन यह काम का हिस्सा है।"
बीते कुछ दिनों में बनारस में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सभी प्रांजल यादव और उनके अफसरों पर भेदभावपूर्ण रवैया करने का आरोप लगा रहे हैं।
जिस दिन मोदी ने नामांकन दाखिल किया था, कांग्रेस ने उन पर खास तौर पर मोदी का पर्चा स्वीकार करने का आरोप लगाया, जबकि दूसरे उम्मीदवारों के पर्चे डिप्टी डीईओ ने स्वीकार किया था।
मोदी के नामांकन पर उठा था सवाल
कांग्रेस का आरोप था कि प्रांजल यादव ने मोदी के नामांकन के वक्त उनके अलावा चार अन्य लोगों को उनके दफ्तर में घुसने की इजाजत दी। यादव ने कहा कि दो भाजपा नेता, एक उम्मीदवार और एक डमी उम्मीदवार था।
कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने मांग की थी कि सर्किल ऑफिसर को हटा दिया जाए, क्योंकि वो भाजपा समर्थक है। यादव ने सफाई में कहा कि वो केवल अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।
इसके बाद भाजपा ने उन पर हमले किए। निष्पक्ष रुख न अपनाने से जुड़े भाजपा के आरोपों पर उन्होंने कहा, "अब मैं इस मामले में क्या कह सकता हूं? वो वही कर रहे हैं, जो करना चाहते हैं।"
क्यों नहीं दी रैली की इजाजत, यह रही वजह
बनारस के डीएम ने बताया कि उन्होंने बेनियाबाग रैली की इजाजत क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा, "स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट और खुफिया रपट नेगेटिव थी। यहां तक कि मुख्यमंत्री सुरक्षा में लगे डीएसपी ने भी नेगेटिव रिपोर्ट दी थी।"
उन्होंने कहा कि भाजपा को अन्य चार कार्यक्रमों के लिए इजाजत मिल गई थी। यादव शादीशुदा हैं और उनकी बेटी है। वो शाहजहांपुर के रहने वाले हैं औ आईआईटी रुड़की से पढ़े हैं।
मेकेनिकल इंजीनियर महाराजगंज और आजमगढ़ के डीएम रह चुके हैं, जहां से उन्हें एडिशनल कमिश्नर, रूरल डेवलपमेंट और मनरेगा बनाया गया, लेकिन उन्होंने जॉइन नहीं किया। बाद में वो बनारस ट्रांसफर कर दिए गए।