फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

अटल बिहारी वाजपेयीः अब तक नहीं टूटा ये रिकॉर्ड

Wed, 09 Apr 2014 07:31 AM IST
विनीता वशिष्ठ/ अमर उजाला, दिल्ली
विनीता वशिष्ठ/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 09 Apr 2014 07:31 AM IST
विज्ञापन
vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

भाजपा इस बार अटल बिहारी वाजपेयी का करिश्मा दोहराने का प्रयास कर रही है।

विज्ञापन


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर चार राज्यों से जीतकर संसद पहुंचने का रिकार्ड है जिसे अभी तक कोई भी सांसद नहीं तोड़ पाया है।

अपने बेदाग राजनीतिक जीवन और कुशल वक्तव्य कला के बल पर भाजपा को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाने वाले वाजपेयी का राजनीतिक जीवन विविधता भरा रहा है। उन्होंने अपने संसदीय जीवन में कई दिलचस्प चुनाव लड़े और कई रिकार्ड बनाए।

पहले चुनाव में ही खा गए मात

vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

वाजपेयी यूं तो काफी समय से राजनीति में सक्रिय थे लेकिन उन्होंने चुनाव मैदान में पहला कदम सन 1955 में रखा। रोचक बात ये रही कि पहले ही चुनाव में वाजपेयी हार बैठे।

दरअसल सन 1955 में लखनऊ की सीट से विजयलक्ष्मी पंडित ने लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। लखनऊ में चुनाव की तिथि घोषित हुई और वाजपेयी जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद पड़े।

बताते हैं कि उस वक्त साधनहीनता के चलते अटल जरूरी प्रचार नहीं कर पाए और हार गए। हालांकि उस वक्त भी अटल के भाषण के सुनने के लिए चौराहों पर हजारों की संख्या में लोग जुटते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

...जब अटल की जमानत तक जब्त हो गई

vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

रोचकता से लिहाज से देखा जाए तो वाजपेयी का दूसरा चुनाव काल भी कम दिलचस्प नहीं था। 1957 में जनसंघ ने वाजपेयी को तीन सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर पर चुनाव लड़ाया

लखनऊ का चुनाव वो साढ़े बारह हजार वोटों से हार बैठे, मथुरा में तो उनकी जमानत तक जब्त हो गई । हालांकि बलरामपुर का चुनाव वाजपेयी ने दस हजार मतों के अंतर से जीत लिया था।

उस समय किसी भी पार्टी के लिए यह आवश्यक था कि वह कम से कम तीन प्रतिशत मत प्राप्त करे, अन्यथा उस पार्टी की मान्यता समाप्त की जा सकती थी यह तो गनीमत थी कि भारतीय जनसंघ को छह प्रतिशत मत प्राप्त हुए वरना जनसंघ की सदस्यता ही समाप्त हो जाती।

विज्ञापन

‌महाराज से हार बैठा ग्वालियर का लाल

vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

1984 में अपनी जन्मभूमि से चुनाव लड़ना वाजपेयी जी को केवल इसलिए भारी पड़ गया क्योंकि ग्वालियर की जनता ने उनके बजाय अपने राजा को वोट दिया।

दिलचस्प बात ये रही कि माघव राज सिंधिया की माताजी यानी विजयाराजे सिंधिया भाजपा में थी और इस लिहाज से उनका समर्थन वाजपेयी को मिला था। वाजपेयी ने ग्वालियर के राजमहल में ही अपना चुनाव कार्यालय जमाया और प्रचार किया। वाजपेयी और सिंधिया के बीच तगड़ा मुकाबला था।

एक तरफ लोग राजमहल के प्रति निष्ठा दिखा रहे थे तो दूसरी तरफ ग्वालियर की संतान के रूप में वाजपेयी के भाषणों में खूब भीड़ जमती थी। हालांकि कांग्रेस ने ऐन चुनाव से पहले सिंधिया का नाम प्रत्याशी के तौर पर घोषित किया था और वाजपेयी विजयाराजे का साथ पाकर आश्वस्त थे लेकिन फिर भी उम्मीद से उलट हो गया।

ग्वालियर की महारानी विजयाराजे की सियासत काम न आई और वाजपेयी को हराकर युवराज सिंधिया जायंट किलर के रूप में पहचाने जाने लगे।

वाजपेयी के नाम पर हैं दिलचस्प रिकार्ड

vajpeyee's untouched record to win election from 4 states

वाजपेयी एकमात्र सांसद हैं जो देश के चार राज्यों से संसदीय चुनाव लड़े और विजयी रहे हैं। वाजपेयी ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात से संसदीय चुनाव लड़े हैं।

वाजपेयी के नाम पर एक और दिलचस्प रिकार्ड है। वाजपेयी एकमात्र सांसद हैं जिन्होंने छह भिन्न संसदीय सीटों से चुनाव लड़े और जीते हैं। इन सीटों के नाम हैं, बलरामपुर, ग्वालियर, नई दिल्ली, विदिशा, गांधीनगर और लखनऊ।

वाजपेयी एकमात्र सांसद हैं जो दो मौकों पर दो अलग अलग राज्यों की सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। 1991 में नो मध्य प्रदेश की विदिशा सीट और उत्तर प्रदेश की लखनऊ सीट से जीते। 1996 में वाजपेयी उत्तर प्रदेश की लखनऊ सीट से और गुजरात की गांधीनगर सीट से जीतकर संसद में पहुंचे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed