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वाड्रा-डीएलएफ मामले में खेमका पर उठे सवाल

डॉ. सुरेंद्र धीमान/चंडीगढ़

Updated Thu, 27 Dec 2012 09:10 AM IST
vadra got clean chit khemka order is not in rule
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की डीएलएफ से हुई डील के मामले में तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी डॉ. अशोक खेमका के दो आदेशों की जांच कर रही हाई पावर कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है।
सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कमेटी वाड्रा को क्लीन चिट देने और खेमका के आदेश नियमानुसार न होने के नतीजे पर पहुंची है। यह रिपोर्ट गुरूवार को मुख्य सचिव पीके चौधरी को सौंपी जा सकती है। वैसे रिपोर्ट सौंपने का समय 26 दिसंबर को समाप्त हो गया है।

आईएएस खेमका का तबादला गत 11 अक्तूबर को हुआ था। उसके बाद उन्होंने दो आदेश पारित किए थे। पहला आदेश 12 अक्तूबर को पारित करते हुए पलवल, मेवात, फरीदाबाद और गुड़गांव के उपायुक्तों से रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनियों के नाम पर की गई खरीद-फरोख्त जमीन का डाटा भेजने, स्टांप ड्यूटी की कमी का पता लगाने और कमी पाए जाने पर शेष राशि खजाने में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे। दूसरा आदेश 15 अक्तूबर को पारित किया था। इसमें वाड्रा की कंपनी द्वारा गुड़गांव में डीएलएफ को बेची गई जमीन का इंतकाल रद करने का था।

19 अक्तूबर को गठित की कमेटी
मीडिया में मामला उछलने के बाद हरियाणा सरकार ने 19 अक्तूबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व कृष्ण मोहन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव केके जालान और वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव राजन गुप्ता शामिल किए गए थे। कमेटी को एक महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। सरकार ने 19 नवंबर को एक महीने का समय बढ़ा दिया। फिर 19 दिसंबर को एक सप्ताह और बढ़ाकर 26 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा गया।

कम स्टांप ड्यूटी अदा नहीं की गई
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि रॉबर्ट वाड्रा या उनकी कंपनियों के नाम जमीन की जितनी भी खरीद-फरोख्त हुई है, किसी में भी स्टांप ड्यूटी कम अदा नहीं की गई। अशोक खेमका का इंतकाल रद करने का पारित आदेश नियमानुसार नहीं था। दूसरी पार्टी को सुनवाई का मौका दिए बगैर एकतरफा आदेश पारित किया गया था। चारों जिलों के उपायुक्त पहले ही रॉबर्ट वाड्रा को क्लीन चिट दे चुके हैं।

सही तथ्यों का पता लगाने को कहा था सरकार ने
सरकार ने कमेटी से कहा था कि अशोक खेमका ने 12 अक्तूबर को लिखे पत्र में एक इंतकाल और कुछ संपत्तियों की कम कीमत पर सवाल उठाया है। इसके अलावा अशोक खेमका ने 15 अक्तूबर को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा एक विशेष मामले में लेटर ऑफ इंटेंट/लाइसेंस जारी करने की बात कही है जबकि गुड़गांव के उपायुक्त ने कुछ अलग तथ्य सरकार को बताए हैं। सही तथ्यों का पता लगाने और इस प्रक्रिया में कई अथॉरिटी के शामिल होने के कारण सरकार ने यह कमेटी गठित की है।

'मैं चंडीगढ़ से बाहर हूं, इसलिए मुझे यह जानकारी नहीं है कि कमेटी ने बुधवार को रिपोर्ट दी या नहीं।'
- पीके चौधरी, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार
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