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हिमालय में पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करेगी सरकार

Thu, 01 Aug 2013 12:02 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Thu, 01 Aug 2013 12:02 AM IST
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uttarakhand government will control tourists in himalay

केदारघाटी की त्रासदी से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार अब हिमालय के क्षेत्रों में धर्माटन व पर्यटन को नियंत्रित करने की तैयारी में है।

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मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने माना है कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या अनियंत्रित होती जा रही है, इसलिए भविष्य में उतने ही लोग वहां जा सकेंगे, जितनों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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बहुगुणा यदि इस ऐलान पर अमल करने में सफल हो जाते हैं तो वे केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की योजना को ही आगे बढ़ाएंगे।

पर्यावरण व वन मंत्री रहते हुए जयराम लगातार कहते रहे हैं कि ग्लेशियरों को बचाना है तो हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन को रेग्यूलेट यानी नियंत्रित करना होगा। उन्होंने हिमालयी राज्यों के लिए बाकायदा दिशा-निर्देश भी दिए थे।
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इससे पहले 1996 में भी बाबा अमरनाथ यात्रा त्रासदी के बाद गठित डॉ. नीतीश सेन कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन को रेग्युलेट करने की जरूरत है। तब इस त्रासदी में 300 तीर्थ यात्री मारे गए थे।

उत्तराखंड सरकार के आंकड़े गवाह हैं कि केदारनाथ त्रासदी के दिन चार धाम क्षेत्र में लगभग डेढ़ लाख लोग मौजूद थे। जबकि इतने लोगों के हिसाब से वहां बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। वर्षों से मांग उठती रही है कि हिमालय खासतौर पर ग्लेशियरों के निकट पर्यटन को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

इस बारे में बहुगुणा ने अमर उजाला से कहा कि हम पर्यटन को रेग्युलेट करेंगे। उतने ही लोगों को आगे जाने दिया जाएगा, जितनों के लिए वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बहुगुणा की इस योजना पर भाजपा भी सहमत है।

उत्तराखंड त्रासदी को लेकर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की गठित कमेटी की अध्यक्ष उमा भारती ने भी कहा है कि वे तो शुरू से कहती रही हैं कि सीमा से ज्यादा लोगों को जाने से रोका जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस त्रासदी से पहले मौसम विभाग की चेतावनी के बाद यात्रियों को चार धाम जाने से रोक दिया जाता तो इतने लोगों की मौत नहीं होती।

जानने लायक यह है कि उत्तराखंड में हर साल दो करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचते रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में ही बीते साल लगभग पांच करोड़ सैलानी पहुंचे थे।

इनमें धार्मिक और सामान्य दोनों तरह के पर्यटक शामिल हैं। जबकि पर्यावरण प्रेमी भी लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रही मानव गतिविधियां ग्लेशियरों के लिए खतरा हैं।


'पुनर्वास में मोदी की मदद ले सरकार'
इधर भाजपा नेता उमा भारती का कहना है कि केदार घाटी त्रासदी के बाद उत्तराखंड के पुनर्वास कार्यों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मदद लेनी चाहिए, क्योंकि मोदी को भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने की महारथ हासिल है।

उत्तराखंड के दौरे से लौटी उमा ने आरोप लगाया कि बहुगुणा सरकार इस त्रासदी से निपटने में पूरी तरह से नाकाम रही है। बहुगुणा सरकार को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि त्रासदी के एक माह बाद भी हालत ज्यादा नहीं सुधरे हैं।

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