फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   uttarakhand floods take 25 lakh save families

'25 लाख ले लो, परिजनों को निकलवा दो'

Thu, 27 Jun 2013 12:20 AM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Thu, 27 Jun 2013 12:20 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand floods take 25 lakh save families

भारी बारिश और सैलाब के बाद उत्तराखंड में फंसे यात्रियों के परिजन हेलीकॉप्टर कंपनियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

विज्ञापन


दिल्ली में एक हेलीकॉप्टर कंपनी से जुड़े अधिकारी ने बताया कि उनके पास रोजाना बड़ी संख्या में फोन कॉल्स आ रही हैं।

इसमें लोग उत्तराखंड में फंसे परिजनों को निकालने के लिए लाखों की पेशकश कर रहे हैं। लेकिन प्राइवेट हेलीकॉप्टरों को सीधे आपदा प्रभावित इलाकों में जाने की अनुमति नहीं है।

हेलीकॉप्टर वायु सेना की अगुवाई में काम कर रहे हैं और निजी हेलीकॉप्टरों को जौली ग्रांट व सहस्त्रधारा हेलीपैड से आगे जाने की अनुमति नहीं है।

25 हेलीपैड बनाएगी एयरपोर्ट अथॉरिटी

उत्तराखंड की आपदा ने केंद्र सरकार को हेलीपैड की अहमियत समझा दी है। राज्य में हेलीपैड की कमी के चलते राहत और बचाव कार्यों में अड़चन आ रही है।

हजारों लोगों के फंसे होने के बावजूद खराब मौसम और हेलीपैड की कमी के चलते ज्यादा हेलीकॉप्टरों की मदद नहीं ली जा रही है।

उत्तराखंड तबाही की संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें
विज्ञापन


उत्तराखंड की त्रासदी से सबक लेते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) देश के 25 दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में हेलीपैड बनाने पर विचार रही है।

एएआई के अध्यक्ष वीपी अग्रवाल ने बताया कि अभी तक अथॉरिटी ने देश में कहीं भी हेलीपैड नहीं बनाए हैं। एएआई ने खुद को सिर्फ हवाई अड्डों के निर्माण तक सीमित रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ज्यादातर हवाई अड्डों पर ही हेलीकॉप्टर उतरने की सुविधा भी है लेकिन उत्तराखंड की त्रासदी के बाद राहत और बचाव कार्यों में हेलीकॉप्टरों की अहम भूमिका को देखते हुए अथॉरिटी हेलीपैड बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। देश के 20-25 दुर्गम इलाकों में एयरपोर्ट अथॉरिटी के हेलीपैड बनाए जा सकते हैं।


अग्रवाल का कहना है कि जल्द ही ऐसे क्षेत्रों की पहचान के लिए एक स्टडी कराई जाएगी, जहां तुरंत हेलीपैड बनाने की आवश्यकता है।

तस्वीरों में: तबाही की निशानियां

गौरतलब है कि देश में बने ज्यादातर हेलीपैड सेना या निजी क्षेत्र के हैं। देश में हवाई अड्डों के निर्माण और रखरखाव का जिम्मा उठाने वाली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अभी तक खुद को हेलीपैड बनाने के काम से दूर रखा है।

अग्रवाल का कहना है कि हेलीपैड बनाने और रखरखाव के खर्च के मुकाबले इससे आमदनी बहुत कम होती है। लेकिन आपात स्थिति में संपर्क के लिहाज से हेलीकॉप्टर के महत्व को देखते हुए अब एएआई इस क्षेत्र में भी कदम रखेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed