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उत्तराखंड त्रासदी की जांच से क्यों डर रही है सरकार?

Mon, 01 Jul 2013 01:39 AM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Mon, 01 Jul 2013 01:39 AM IST
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uttarakhand floods not announcement is a question

उत्तराखंड में आसमान से बरसी तबाही में मरने वालों की संख्या हजारों में पहुंचने की बात सामने आ रही है। नुकसान भी करोड़ों का हुआ है। लेकिन, इस तबाही को लेकर अभी तक राज्य सरकार ने किसी तरह की जांच का ऐलान नहीं किया है।

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जांच होने पर यह बात सामने आ जाएगी कि इस त्रासदी की मुख्य वजहें क्या रही है। प्रशासनिक चूक कहां हुई और भविष्य में इससे क्या सबक सीखा जा सकता है। भाजपा ने जहां इस मसले को जोर शोर से उठाना शुरू कर दिया है। वहीं कांग्रेस बचाव की मुद्रा में आ गई है।
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उत्तराखंड की त्रासदी को लगभग एक पखवाड़ा बीतने को आ गया है। इस घटना के पीछे कई तरह की बातें दिल्ली से लेकर देहरादून तक चर्चा में हैं।

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बताया जा रहा है कि मौसम विभाग ने राज्य सरकार को प्रदेश में सामान्य से काफी तेज बारिश होने की सूचना कुछ दिन पहले ही दे दी थी। लेकिन, इस पर राज्य सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।

वहीं इस बात की चर्चा भी है कि 14 और 15 जून को केदारनाथ में पालकी और घोड़े खच्चर वालों की हड़ताल थी। ये लोग यात्रियों की आवाजाही के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने के विरोध में थे।

चर्चा है कि हड़ताल का मंदिर के पंडितों ने भी समर्थन किया। जिसके चलते दो दिन तक श्रद्धालु मंदिर में दर्शन नहीं कर पाए और हजारों की संख्या में तीर्थयात्री जमा हो गए। अगर दो दिन दर्शन हुए होते तो इतनी बड़ी संख्या में वहां यात्री फंसे नहीं होते और हताहत होने वालों की संख्या कम होती।

हालांकि, इस तरह की बातों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसके अलावा प्रदेश सरकार के पास इस बात का भी लेखा जोखा नहीं है कि उस दौरान उत्तराखंड में कुल कितने पर्यटक और तीर्थयात्री थे।


अमरनाथ यात्रा की तरह यहां यात्रियों की पंजीकरण कराने का प्रावधान नहीं है। भाजपा ने अब जांच की मांग जोर शोर से उठाई है। पार्टी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई।

कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता जगदंबिका पाल ने कहा है कि त्रासदी के बाद सबसे पहली प्राथमिकता लोगों को बचाना है।

अभी भी हजारों लोग फंसे हुए हैं। ऐसे में जांच आयोग गठित नहीं करने की बात को मुद्दा बनाना ठीक नहीं होगा। यह घटना कोई मानव निर्मित नहीं थी बल्कि प्राकृतिक आपदा थी। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

दूसरी तरफ, उत्तराखंड महासभा के संरक्षक हरिपाल रावत ने कहा कि बहुगुणा सरकार को इस मामले की तुरंत न्यायिक जांच करानी चाहिए।

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