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'भेड़-बकरी की तरह रहने को मजबूर हैं आपदा पीड़ित'

Tue, 10 Sep 2013 12:03 AM IST
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली Updated Tue, 10 Sep 2013 12:03 AM IST
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uttarakhand disaster victims living very painful

उत्तराखंड सरकार भले ही बुधवार को केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना कराने की तैयारी में हो, लेकिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का मानना है कि पूजा अर्चना से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि सरकार प्रदेश के आपदा पीड़ितों की सुध ले।

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आगामी लोकसभा चुनाव में गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे खंडूरी ने कहा कि त्रासदी के करीब तीन माह बाद भी बड़ी संख्या में लोग स्कूली इमारतों में शरण लिए हैं। लोग भेड़-बकरी की तरह रहने पर मजबूर हैं।
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केदार घाटी व चमोली से लेकर पिथौरागढ़ का दौरा करके आए खंडूरी ने विशेष बातचीत में कहा कि केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना तो ठीक है, लेकिन वहां के लोगों का पुनर्वास प्राथमिकता होनी चाहिए।
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खंडूरी ने कहा कि जब वहां कोई यात्री जाएगा ही नहीं तो यह पूजा-अर्चना किसके लिए होगी। उन्होंने कहा कि वहां अब भी लाशें मिल रही हैं।

प्रदेश सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि इन पौने तीन माह में कितने गांवों तक राशन-पानी व दवाईयां पहुंचाई गईं। कितने गांवों को सड़कों से जोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पैसे की लूट मची है।

खंडूरी ने कहा कि उनके कार्यकाल में सभी मंत्रियों से कहा गया था कि दिल्ली जाना है तो ट्रेन से जाएं, वे खुद भी ट्रेन से आते-जाते थे, लेकिन अब उत्तराखंड के लगभग सभी मंत्री दिल्ली आने के लिए हवाई जहाज का ही इस्तेमाल करते हैं।


खंडूरी ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की त्रासदी के लिए केंद्र भी जिम्मेदार है। लगभग सभी राष्ट्रीय मार्ग टूटे पड़े हैं, दरअसल, केंद्र ने सीमा सड़क संगठन को 2012-13 व 2013-14 के तय 600 करोड़ रुपए नहीं दिए।

इससे इन सड़कों की देखभाल व मरम्मत नहीं हो पाई। यदि समय रहते मरम्मत हो जाती तो हालत इतने बदतर नहीं होते।

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